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नक्सलियों पर हवाई निगरानी के लिए भिलाई में 28 से यूएवी कैंप
भास्कर न्यूज | भिलाई/नईदिल्ली
दक्षिणबस्तर इलाके में सक्रिय नक्सलियों पर हवाई निगरानी के लिए भिलाई के नंदिनी में यूएवी (मानवरहित विमान) का बेस कैंप 28 फरवरी से काम करने लगेगा। नंदिनी बेस कैंप से उड़ान भरकर यूएवी जंगल में भ्रमण करेंगे और नक्सली गतिविधियों के बारे में फोर्स को जरूरी सूचनाएं देंगेे।
इससे फोर्स को नक्सलियों के मूवमेंट के बारे में उपयोगी जानकारी मिल सकेगी। सोमवार को दिल्ली में हुई केंद्रीय गृह मंत्रालय की बैठक में नक्सल समस्या के निराकरण के लिए महत्वपूर्ण फैसले किए गए। इसमें अहम है नक्सली गतिविधियों की हवाई निगरानी के लिए मानव रहित विमानों का उपयोग करना। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से नक्सल समस्या के निराकरण में रही दिक्कतों पर बात करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शेष|पेज10
बस्तरके विकास को तेज करने का काम तत्काल प्रभाव से शुरू करने के लिए विभिन्न विभागों के अफसरों को निर्देश दिए। इसके तहत बस्तर संभाग के सघन अंधेरे में अब रेल और सड़कों के जरिए विकास की रोशनी पहुंचेगी तो पोस्ट आफिस की पाती के साथ नौकरी करने का अवसर भी मिल सकेगा। यही स्थिति बैंकों में भी रहेगी। साथ ही, लोगों को पढ़ने-लिखने की सुविधाएं, रेडियो, टीवी और एफएम सुनने के अलावा मोबाइल के इस्तेमाल में भी आसानी होगी। केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों की बजाए छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए सबसे ज्यादा प्रतिबद्धता दिखाई है क्योंकि देश में होने वाली घटनाओं में सबसे ज्यादा राज्य के 3 जिलों सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में ही 20 प्रतिशत घटनाएं होती हैं।
देखा जाए तो यह पहली बार है कि केंद्र सरकार ने बस्तर की नक्सल समस्या को राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती माना और समस्या के निदान के लिए पूरी प्रतिबद्धता भी दिखाई। सरकार का मानना था कि यदि नक्सल समस्या का समाधान करना है तो उसकी शुरुआत बस्तर से ही करनी होगी। यही कारण है कि केंद्र ने बैठक में क्षेत्र के विकास से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं के नियमों को शिथिल करते हुए रेल, सड़क, दूर संचार, सूचना प्रसारण मानव संसाधन विकास आदि के मंत्री गणों को अपनी-अपनी योजनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए सिर्फ निर्देशित किया बल्कि उसके लिए एक मानीटरिंग की व्यवस्था की ताकि किसी भी वजह से फाइलों में दबी विकास की योजनाओं को अब जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाते हुए क्षेत्र के लोगों को सीधे उसका लाभ पहुंचाया जा सके।
बताया जा रहा है कि बस्तर के 3 जिलों सुकमा के लगभग 5-6 हजार किमी के क्षेत्रफल में करीब 600-700 माओवादी कैडर, बीजापुर के साढ़े 6 हजार क्षेत्रफल में 400 और दंतेवाड़ा के 3 हजार किमी के क्षेत्रफल में करीब 100 माओवादी कैडर मौजूद हैं। चूंकि इन जिलों की सीमाएं ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र से लगे होने के कारण माओवादियों को छिपने का मौका मिलता रहता है। इसीलिए बैठक में इन राज्यों के प्रतिनिधियों को समन्वित प्रयास पर जोर दिया गया। बहरहाल, केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने का फायदा छत्तीसगढ़ के धुर नक्सली क्षेत्रों को मिलता दिख सकेगा क्योंकि वहां के स्थानीय युवकों को सिर्फ पोस्ट आफिस, बैंक की सुविधाएं मिलेंगी बल्कि उसमें नौकरी का अवसर भी मिलेगा। वहीं रेल और सड़क सुविधाओं के विकास के अलावा लोगों को लिखने-पढ़ने की सुख-सुविधाओं और आवासीय छात्रावासों के साथ-साथ बीएसएनएल के बंद पड़े 270 टावरों को तुरंत चालू होने, रेडियो, टीवी और एफएम से लोगों को काफी लाभ मिल सकता है।
ऐसा है बेस कैंप : यूएवी बेस कैंप 210 एकड़ में 26 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है।छत्तीसगढ़ में फिलहाल 2 यूएवी हैं। बाद में 10 और यूएवी मंगाए जाएंगे।
केंद्र के साथ सहमति वाले मुद्दों के प्रमुख बिंदु
{28 फरवरी से यूएवी (मानवरहित विमान) कैम्प भिलाई से प्रारंभ होगा।
{ बस्तर के हर पंचायत में पोस्ट आफिस और बैंक शाखाएं खुलेंगी। इनमें स्थानीय लोगों की भर्ती होगी।
{ बीएसएनएल के बंद पड़े 270 मोबाइल टावरों को चालू किए जाएंगे।
{ रेडियो, टीवी नेटवर्क और एफएम का शत-प्रतिशत दायरा बढ़ाया जाएगा।
{ पर्यावरण अनुमति का अधिकार 5 हेक्टेयर से बढ़ाकर 40 हेक्टेयर तक करने की मांग।
{ बस्तर के आसपास 514 किमी सड़कों के साथ ही दो शेष|पेज10
पुलोंका भी निर्माण जल्द होगा।
{ सड़क परिवहन मंत्रालय दो चरणों 6 और 11 हजार करोड़ के जरिए बिछाएगा सड़कों का जाल।
{ आधुनिक तकनीक से फ्री कास्ट फैब्रिकेटेड पुल बनाए जाएंगे।
{ दोरनापाल से जगरगुंडा नेशनल हाइवे को अब खुद राज्य सरकार बनाएगी।
{ सीआरपीएफ की बची 6 बटालियनें राज्य को जल्द ही मुहैया कराई जाएंगी।
{ पोटा केबिन स्कूल का अब 8वीं कक्षा से 10वीं कक्षा तक विस्तार होगा।
{ दंतेवाड़ा के 11 विकासखंडों में 500 सीटर आश्रम छात्रावास बनेंगे।
दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह।