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मेडिकल में प्रवेश मिल गया था, लेकिन संगीत को चुना

7 वर्ष पहले
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संगीत कासंस्कार उनको घर में ही मिला। उनके पिता पंतुला गोपाला भी वायलिन वादक हैं और मां पंतुला पद्मावती वीणा वादक। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी से ही संगीत में पीएचडी की। शिक्षण के दौरान ही उनकी धूम रही। बीए (म्यूजिक) में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया और एमए में भी। जबकि रांची के केंद्रीय विद्यालय से जब स्कूली शिक्षा पूरी हुई और 12वीं के बाद उनको मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल रहा था। अपने गुरु और माता-पिता की सलाह से तय किया कि संगीत की तालीम ही ज्यादा अहम है।

आठ साल की उम्र से ही उन्होंने स्टेज पर कार्यक्रम देना शुरू कर दिया था। रेकी की मास्टर रमा की शादी भी संयोग से वायलिनिस्ट और गायक से ही हुई। हालांकि पति ने इलेक्ट्रॉनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उनसे मुलाकात कार्यक्रमों में ही होती रहती थी। रमा के पिता विशाखापत्तनम में बस गए, तब कार्यक्रमों में जाना-आना होता रहता था। मूर्ति का परिवार भी यहीं रहा करता था। दोनों के परिवार एक दूसरे को जानते थे। 2004 में दोनों की मेल-मुलाकात संबंध में तब्दील हो गई। घरवालों की सहर्ष अनुमति से दोनों का विवाह हुआ। कर्नाटक संगीत की ख्यात गायिका जलजाक्षी इनकी सास हैं।

दोनों पति प|ी केवल देश में वरन् विदेश में भी जाने-माने कलाकार हैं। बातचीत में रमा ने कहा- विशेषतौर पर यह छापिए देश की आबादी को देखकर हम दोनों ने संकल्प लिया है कि परिवार नहीं बढ़ाएंगे। इस फैसले से उनके ससुराल पक्ष के लोग भी सहमत हैं। कुछ नया सीखने की प्रवृत्ति रमा में हमेशा से ही रही। धड़ल्ले से हिंदी बोलने वाली रमा ने श्वसुर से रेकी सीखी और उसमें थर्ड डिग्री ली। फैशन डिजाइनिंग में दखल रखने वाली रमा ने कारगिल युद्ध के दौरान संगीत के जरिए अपनी मदद पहुंचाई थी। कुछ लोगों के साथ मिलकर उन्होंने संगीत के जरिए तब कुछ लाख रुपए जमा किए और मदद जरूरतमंदों तक पहुंचाई थी। 87 साल से चल रहे मारगाजी फेस्टिवल का आयोजन दक्षिण भारत में हर साल दिसंबर में होता है। इसमें बचपन से भाग ले रही रमा इस बार श्रेष्ठ साबित हुईं।

(जैसाउन्होंने भास्कर को बताया।)