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तीन दिन तक बिखरेगी नृत्य और संगीत की छटा

6 वर्ष पहले
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इंदिराकला संगीत विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव का शुभारंभ 9 फरवरी को होगा। इस अवसर पर विधायक गिरवर जंघेल, संस्कृति पुरातत्व विभाग संचालक राकेश चतुर्वेदी, कुलपति प्रो.डॉ.मांडवी सिंह बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे। समापन समारोह 11 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के मुख्य आतिथ्य में होगा। इस अवसर पर पंचायत संस्कृति मंत्री अजय चंद्राकर, विवि संस्थापक परिवार सदस्य राजा रविंद्र बहादुर सिंह पूर्व नपा अध्यक्ष विक्रांत सिंह मौजूद रहेंगे।

महोत्सव में इस दफे भी नृत्य-संगीत विधा के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। महोत्सव में पहले दिन पद्मभूषण पं.छन्नूलाल लाल मिश्रा के सुपुत्र प्रख्यात तबला वादक पं.रामकुमार मिश्रा का तबले पर एकल वादन, विख्यात वायलिन वादिका संगीत विदूषी पद्मभूषण डॉ.एन राजम ठाणे मुंबई पुत्री संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर, नंदिनी शंकर की प्रस्तुति होगी।

ओडिसी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा के ओडिसी नृत्य उपरांत विवि के लोकसंगीत और कला संकाय के छात्र छात्राओं की प्रस्तुति होगी। 10 फरवरी को संगीत, नृत्य और लोकसंगीत के विद्यार्थियों द्वारा फाग की सांगीतिक प्रस्तुति होगी। शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध गायक पद्मभूषण पं.छन्नूलाल लाल मिश्रा बनारस, सुप्रसिद्ध कत्थक कलाकार असीम बंधु भट्टाचार्य कोलकाता, लोक गायक मन्नू यादव बनारस एवं भूपेंद्र साहू गरियाबंद के लोकदल रंग सरोवर की प्रस्तुति होगी।

महोत्सव के अंतिम दिवस नाट्य विभाग की प्रस्तुति उपरांत ओडिसा के कलाकार चित्रसेन स्वाइन भुवनेश्वर द्वारा निर्देशित गोटी पुआ लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत गायिका सुश्री प्रियदर्शनी कुलकर्णी पुणे सहित संतोष रघुवंशी पाटन के लोक सांस्कृतिक कला मंच हरेली की प्रस्तुति होगी।

वायलिनवादन की प्रस्तुति

महोत्सवमें सुप्रसिद्ध वायलीन वादिका डॉ.एन राजम थ्री जनरेशन प्रोग्राम के रूप में पुत्री संगीता शंकर उनकी दो बेटियों के साथ वायलिन वादन की प्रस्तुति देंगी। ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनियां भजन के बोलों को वायलिन की तान में प्रस्तुत कर सुर्खियां बटोर चुकी और बनारस हिंदू विवि से सेनि डॉ. राजम को 2004 मे कला क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पद्मविभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

लयकारी, गति, अभिनय भाव के माध्यम से कत्थक की प्रस्तुति देने वाले असीम बंधु भट्टाचार्य कोलकाता द्वारा कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। कत्थक के जयपुर और लखनऊ घराने की मिश्रित शैली अपनाने वाले श्री बंधु प्रसिद्ध कोरियोग्राफर भी है। वे अपनी कला की छटा बिखेरेंगे।

ख्याति प्राप्त कलाकार देंगे अपनी उपस्थिति

महोत्सवके तीन दिवसीय आयोजन में कला जगत के ख्याति प्राप्त कलाकार शिरकत करेंगे। इनमें शास्त्रीय संगीत गायक पद्मभूषण पं.छन्नूलाल मिश्र अपनी प्रस्तुति देंगे,अगस्त 1936 को आजमगढ़ में जन्मे पंडित मिश्र गायकी में बनारस घराने के श्रेष्ठ गायक के रूप में प्रतिष्ठित है। पं.मिश्र ख्याल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी, भजन और चैती गायकी के लिए जाने जाते हैं।

राधा कृष्ण की लीलाओं में गोटी पुआ की प्रस्तुति

राधाकृष्ण की लीलाओं से प्रेरित ओडिसा के लोकप्रिय लोकनृत्य गोटी पुआ की प्रस्तुति चित्रसेन स्वाइन भुवनेश्वर द्वारा दी जाएगी। पारंपरिक भोजपुरी बिरहा को लोकप्रिय बनाने वाले उप्र के बनारस से पधार रहे डॉ.मन्नू यादव द्वारा लोकगीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। डा.यादव अब तक बिरहा, लोरिकी, चंदैनी, सोहर, कजरी, पूर्वी, छपरिया आदि शोध के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार ले चुके हैं।