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जीवन की गहराइयों से जुड़ा है संगीत: डॉ. राजम

6 वर्ष पहले
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शास्त्रीयसंगीत महज मनोरंजन का माध्यम नहीं संस्कारों से ओतप्रोत जीवन की अभिन्न परिभाषा मानने वाली पद्मभूषण डॉ. एन राजम का कहना है कि लोगों की यह धारणा है कि शास्त्रीय संगीत कठिन है और उसका समाज से कोई ज्यादा सरोकार नहीं है, लेकिन शास्त्रीय संगीत जीवन की गहराइयों से जुड़ा है और वर्तमान परिवेश मे केवल तनावमुक्त जीवन का स्त्रोत है बल्कि आशावाद का पर्याय भी है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय मे चल रहे खैरागढ़ महोत्सव में तीन पीढिय़ों की वायलिन पर साझा प्रस्तुति देने आई पद्मभूषण डॉ. एन राजम ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शास्त्रीय संगीत को आजादी के बाद उस तरह से तवज्जो नहीं मिली, जिसका वह हकदार है।

आजादी से पहले राजघरानों में यह गाया बजाया जाता था, लेकिन आजादी के बाद जब टीवी का दौर आया तो शास्त्रीय संगीत के उत्थान उसके प्रचार-प्रसार को लेकर सकारात्मक प्रयास करना छोड़कर दोयम दर्जे के संगीत को मनोरंजन के रूप मे ज्यादा परोसा गया। आज इंटरनेट का दौर है। हम आसानी से शास्त्रीय संगीत को आम लोगों तक पहुंचा सकते हैं, लेकिन इसके लिए जनमानस को शास्त्रीय संगीत की और उसके नीतिगत संस्कारों की शिक्षा देनी होगी। डॉ. राजम की सुपुत्री संगीता शंकर ने कहा कि हम आशावादी है और पीढ़ियों से संगीत सेवा कर रहे है। शास्त्रीय संगीत कभी मर नहीं सकता प्रयास तो औरंगजेब ने भी किया था, लेकिन जिन विधाओं के साथ ईश्वरीय शक्ति प्रकृति का जुड़ाव है। वह निरंतर प्रगति कर सकता है आवश्यकता केवल बेहतर प्रयास की है। श्रीमती शंकर बताती है कि वो वायलिन वादन के साथ शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार को लेकर भी जुटी है, अपनी टीम के साथ लगातार अभियान चला रही है। वहीं गायन शैली में वायलिन वादन को एक नया स्वरूप देने वाली डॉ.राजम बताती हैं। वायलिन अर्थात बेला पर गज चलाने से निरंतर स्वर प्रवाहित होता है, जो गायन शैली के लिए अच्छा है। उन्होंने संगीत नगरी की तारीफ की।

3 साल से सीखते हैं वायलिन

पहलेवायलिन पर तंत्र वादन शैली प्रचलित रही, उन्होंने कंठ शैली का अविष्कार किया। उन्होंने बताया कि हमारे परिवार में पैदाइश के साथ ही वायलिन का सुरीला माहौल बच्चों को मिलता है। तीन साल के बाद बच्चे विधिवत वायलिन शिक्षा प्राप्त करते है,तीसरी पीढ़ी के रूप मं उनकी नातिन रागिनी शंकर इंजीनियरिंग नंदनी सीए की पढ़ाई कर रही है लेकिन वायलिन वादन अनवरत जारी है और यही शास्त्रीय संगीत मे उनके जीवन की सफलता है।