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लय, ताल और संगीत ने बांधे रखा

6 वर्ष पहले
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खैरागढ़महोत्सव के दूसरे दिन शास्त्रीय लोक संगीत की धूम रही। मंच पर सबसे पहले विवि के थियेटर विभाग के छात्रों द्वारा नाट्य रचना ताजमहल का टेंडर की प्रस्तुति दी गई। निर्देशक धीरज सोनी ने कलाकारोंं के साथ ताजमहल के टेंडर नाट्य मे व्यंग्य को बखूबी चित्रित किया। वर्तमान परिवेश में इसके निर्माण की प्रक्रिया का मंचन कर छात्र कलाकारो ने हास्य-व्यंग्य का पुट दिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

नाटक मंचन के उपरांत पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र द्वारा शास्त्रीय एवं उप शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी गई। शास्त्रीय गायन के महारथी पं. मिश्र ने मंच पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। पूरी प्रस्तुति में खास बात यह रही कि उन्होंने विवि के कला साधकों को ध्यान में रखकर केवल शास्त्रीय और उप शास्त्रीय गायन की अलग-अलग विधाओं को अपने सुर में ढाला बल्कि अपने प्रत्येक प्रस्तुतियों की व्याख्या करते हुए साधकों को तालीम दी। पं. मिश्र ने बंसुरिया अब बजाओ श्याम के रूप मे ठुमरी की प्रस्तुति दी जिसमें ठुमरी के अलग-अलग स्वरूपों मे इस गीत को चार मुखड़ो मे प्रस्तुत किया वहीं तोरे नैना के लागे कटार सजनी के रूप में दादरा पेश किया जिसे कलाप्रेमियों ने खूब सराहा,सेजिया से सैंय्या रूठीं गइन चैती और कजरी के रूप में उन्होंने गोरिया गीत की प्रस्तुति दी। साथ ही बनारसी में अपने पसंदीदा गीत सखियां गाए कजरिया झूम-झूम के और बनारस के प्रसिद्ध मसान की होली गीत खेले मसान मे होरी दिगंबर की प्रस्तुति उपरांत अंतिम प्रस्तुति के रूप मे उन्होंने छात्र कलाकारों की मांग पर दुनिया दर्शन का है भजन प्रस्तुत किया। पं. मिश्र की समूची प्रस्तुति ने कलाप्रेमियों को देर तक बांधे रखा और उनकी प्रत्येक प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ अभिनंदित किया। उनके साथ तबले पर पुत्र पं. रामकुमार मिश्र हारमोनियम मे विवि के शोधार्थी गौरव पाठक ने संगत दी।

असीमबंधु साथियों ने बांधा मंच: गायनउपरांत प्रसिद्ध कत्थक कलाकार कोरियोग्राफर पं. असीम बंधु भट्टाचार्य साथियों द्वारा रंगमंच पर आधुनिकता से ओतप्रोत कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। जयपुर लखनऊ घराने की मिश्रित शैली में उनकी नृत्य समूह ने ईश्वरीय आराधना के साथ मंच पर अपनी प्रस्तुति प्रारंभ की। महाभारत के प्रसंग को लेते हुए भगवान श्रीकृष्ण के असीम व्यक्तित्व चरित्र को मंच पर उतारा। वहीं सिंह अवतार, वामन अवतार वराह अवतार सहित दशावतार को उन्होंने कत्थक के माध्यम से मंच पर बखूबी प्रदर्शित किया। साथ ही स्त्री विरह वेदना को सजनवा सावन बीता जाए गीत पर उन्होंने एक अलग अंदाज में ही पेश किया। वहीं सुप्रसिद्ध गजल रचना जो हममें तुम मे करार था, तुम्हें याद हो कि याद हो पर पं. असीम बन्धु की शिष्याओं ने मुजरे की वास्तविक स्वरूप को बड़ी खूबसूरती बानगी के साथ प्रस्तुत किया।

मन्नूलालसाथियों ने दी प्रस्तुति: कत्थकउपरांत अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक गायक डॉ. मन्नूलाल यादव साथियों की प्रस्तुति हुई। बिरहा गीत के लिए कला जगत में अपनी अलग पहचान रखने वाले डॉ. यादव ने मंच पर बिरहा के अलग-अलग प्रकारों को प्रस्तुत किया। विरह के रूप में एक-दूसरे से दूर होने की पीड़ा को उन्होंने गुलजार मधुर रागन में लालिमा, सखियन के संग में चली है मधुबाला सहित सुंदर रचनाओं की प्रस्तुति दी। वहीं जीभ पकड़कर उन्होंने जब गीत को सुर दिया तो कौतूहल में डूबे कलाप्रेमियों ने जोरदार तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया। अपने लोकगीतों में डॉ. यादव ने लोरकी, कजरी, चैता, चंदैनी आदि गीतों की प्रस्तुति दी साथ ही सामाजिक चेतना से ओतप्रोत भु्रण हत्या पर गीत की प्रस्तुति दी। अपने गीतों में क्रांतिकारियों का वर्णन और मिर्जापुर की कजली बिलासपुर की भोजली को भी उन्होंने बड़ी खूबसूरती से प्रस्तुत किया। फिर लोक कलाकार भुपेन्द्र साहू ने प्रस्तुति दी।

पं. छन्नूलाल मिश्र के संगीत पर पं. रामकुमार मिश्र की ताल ने श्रोताओं को बांधे रखा।

ताजमहल के टेंडर के मंचन के दौरान हर दृश्य पर लोगों की हंसी फूटी।

महरी और गोटीपुआ की परिष्कृत शैली है ओडिसी: सुजाता

खैरागढ।खैरागढ़ महोत्सव में पहुंची ओडिसी नृत्य की प्रख्यात नृत्यांगना सुजाता महापात्र ने मंच पर अपनी प्रस्तुति से पहले ओडिसी नृत्य और अपने जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर बताया कि ओडिसी महरी गोटीपुआ नृत्य की परिष्कृत नृत्य शैली है और इस शैली के निर्माण मे उनके गुरू ससुर पं.केलुचरण महापात्र जी ने अपना जीवन समर्पित किया है,ओडिसी आज जिस भी रूप में कलाप्रेमियों के बीच है उसमें उनका सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने ओडिसी को सीखने समझने में लगभग दो दशक तक अथक मेहनत की है और जो कुछ भी है उसमें गुरू केलुचरण महाराज पं.रतिकांत महापात्र का सार्थक योगदान है। सफलता के पीछे गुरू का शुभाशीष मानते हुए श्रीमती महापात्रा ने बताया एक छोटे शहर आम मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर वो विश्व मंच पर ओडिसी की सेवा कर रही है।