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शिविर में हो रही मलेरिया की जांच

7 वर्ष पहले
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गातापारजंगल क्षेत्र में हुई दो सगी बहनो की मौत की खबर के बाद स्वास्थ्य अमला हरकत मे गया है। गातापार जंगल के ग्राम पंचायत बरगांव नवागांव में शुक्रवार को एक ही परिवार के दो की बे्रन फीवर से मौत हो गई। इसकी खबर अमले को लगते ही विभाग में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद से विभाग लगातार गातापार जंगल क्षेत्र में शिविर लगाकर जांच कर रहा है। गौरतलब है कि गातापार जंगल का पूरा क्षेत्र मलेरिया जन्य घोषित है। इसके बाद भी इलाके में स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों की कमी का खामियाजा बीमार लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

गैंदलाल यादव की बड़ी बेटी 19 साल की गिरजा और 18 साल की किरण यादव की कुछ दिनों से तबियत खराब थी। शुक्रवार को तबियत ज्यादा बिगडऩे पर दोनों को पांडादाह के स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया था। जहां बड़ी बेटी गिरजा ने कुछ देर में ही दम तोड़ दिया था। वहीं छोटी लड़की किरण को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां रात ढाई बजे के आसपास उसकी भी मौत हो गई। इसकी खबर लगते ही स्वास्थ्य विभाग का अमला हरकत में गया और रविवार को पूरे दिन डाक्टरों की टीम गातापार जंगल के बरगांव नवागांव और करेलागढ़़ मंे तंबू तानकर ग्रामीणों का परीक्षण करती रही।

गातापार जंगल क्षेत्र में नहीं हैं कर्मचारी

गातापारजंगल सहित आसपास का पूरा क्षेत्र मलेरिया जन्य घोषित होने के बाद भी आज तक मलेरिया मुक्त नही हो पाया है। विभाग में वर्कर नहीं है। इसलिए आरएचओ से काम चलाया जा रहा है,जो एएनएम के साथ मिलकर दवाई वितरण सहित अन्य काम करती है, जबकि डीडीटी पावडर का भी गिनती के गांवों में छिड़काव होता है।

लोकल इलाज महंगा पड़ा

स्वास्थ्यअमले की कमी से जूझ रहे इलाके में नीम हकीमों से इलाज की बात सामने आई है। सीएमओ महोबे और मलेरिया अधिकारी के साथ पहुंची टीम ने बरगांव नवागांव और करेलागढ़ में शिविर लगाकर आर डी किट से 122 स्लाइड से 40 ग्रामीणों की मलेरिया जांच की, जिसमें 14 प्रभावित पाए गए। वहीं बच्चियों की मौत के मामले में बताया गया कि दोनों को स्थानीय नीम हकीमों के पास ही कुछ दिन तक इलाज कराया गया। गलत इलाज के कारण मामला बिगड़ गया और अस्पताल पहुंचाया गया।

खैरागढ़ में भी हुआ इलाज

गैंदलालकी बड़ी बेटी गिरजा को तबियत ज्यादा खराब होने पर बुधवार 10 सितंबर की रात 8 बजे के आसपास सिविल अस्पताल के नीचे वार्ड मे भर्त