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संगीत संवर्धन में विवि की भूमिका महत्वपूर्ण : गिरवर
इंदिराकला संगीत विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव का उदघाटन क्षेत्रीय विधायक गिरिवर जंघेल के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। विधायक गिरवर जंघेल ने कहा कि संगीत कला जीवन का अभिन्न अंग है और ऐसे दौर में जब कला संगीत का बाजारीकरण व्यापक हो रहा है हमें अपनी परंपरागत कलाओं को बचाने और उसके संवर्धन के लिये जिम्मेदारी के साथ आगे बढऩा होगा।
श्री जंघेल ने संगीत, कला ललित कला के संवर्धन संरक्षण को लेकर विश्वविद्यालय की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय केवल संगीत कला को बचाने का प्रयास कर रही है बल्कि इन कलाओं को राष्ट्र समाज से जोडऩे अपनी महती भूमिका का निर्वहन भी कर रही है। अध्यक्षीय आसंदी से कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने खैरागढ़ महोत्सव की शुरूआत का वृतांत जाहिर करते हुये बताया कि 2011 में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के विश्वविद्यालय आगमन उपरांत खैरागढ़ महोत्सव की रूपरेखा को स्वरूप मिल पाया जिसकी अवधारण समाजसेवी सिद्धार्थ सिंह ने की थी। खैरागढ़ महोत्सव के लिए आगामी वर्ष 1.50 करोड़ रू. के बजट प्रावधान की स्वीकृति प्रदान की गई है। कुलपति ने बताया कि खैरागढ़ विवि की तर्ज पर तीन वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश के ग्वालियर भुवनेश्वर उड़ीसा में भी संगीत कला के विवि की स्थापना की गई।
खैरागढ़ महोत्सव में आज होंगे ये कार्यक्रम
दूसरेदिन विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित महोत्सव में मंगलवार को शाम 6 बजे से संगीत एवं नृत्य संकाय की प्रस्तुति गायन,वादन एवं नृत्य, शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन पं छन्नूलाल मिश्र, कत्थक नृत्य पं असीम बंधु, लोक गीत डा मन्नू यादव, रंग सरोवर सांस्कृतिक कार्यक्रम भूपेंद्र साहू द्वारा प्रस्तुत की जाएगी।
विवि के कुलगीत की प्रस्तुति देते यूनिवर्सिटी के छात्र।
नदी के तट पर बसी है संगीत की नगरी: चतुर्वेदी
विशिष्टअतिथि के रूप में उपस्थित संस्कृति विभाग के संचालक राकेश चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय के स्थापना वर्ष 1956 के परिवेश को शब्दों में चित्रांकित करते हुए कहा कि संभवत: मुसका, पिपरिया आमनेर नदी के तट पर बसे इस खूबसूरत शहर के असीम प्राकृतिक सौंदर्य ने ही राजा रानी को अपना विशालकाय भव्य राजमहल दान कर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रेरित किया होगा। श्री चतुर्वेदी ने खैरागढ़ से अपनी बाल्यावस्था की स्मृतियों से जोड़ते हुये कहा कि हर व्यक्ति में एक महान कलाकार होता है आवश्यकता उस कलाकार को निखारने की है। उन्होंने उन्नति की कामना करते हुए संवर्धन के लिए चिंतन की आवश्यकता बताई।