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तबला, वायलिन और ओडिसी नृत्य ने विवि में बांधा समां

6 वर्ष पहले
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खैरागढ़महोत्सव के पहले दिन तबला, वायलिन ओडिसी नृत्य के नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कलाप्रेमियों का मन मोह लिया। महोत्सव के शुभारंभ बाद मंच पर सुप्रसिद्ध तबला वादक पं. रामकुमार मिश्र की प्रस्तुति हुई बनारस घराने के ख्याति लब्ध कलाकारों में शामिल पं. मिश्र ने अपने एकल तबला वादन से उपस्थितजनों को हतप्रभ कर दिया।

ना धिं धिं ना के उस्ताद कहे जाने वाले पं.अनोखे लाल मिश्र के नवासे पं. रामकुमार ने तबले पर जब अपनी उंगलियां थिरकाई तो तबला प्रेमी अपने आप को रोक नहीं पाए और तालियों की गूंज के बीच इनका वादन अनवरत एक घंटे तक चलता रहा। उन्होंने मंच पर अपनी विभिन्न प्रायोगिक प्रस्तुतियों के साथ अपने नाना अनोखेलाल मिश्र का कायदा, बनारसी बंदिश पांच दर्जे की गत, गुरू उस्ताद अल्लारखा खां साहब से सीखी पंजाब घराने दिल्ली के मसूर घराने की प्रस्तुतियां दी।

बनारस की खास बाठ गत का रेला कायम करते हुए जब रामकुमार मिश्र ने तबले पर थाप थिरकन दी तो दर्शकदीर्घा वाह वाह कर झूम उठे, उनके वादन में प्रख्यात तबला वादक शारदा प्रसाद जी उदय महाराज की झलक नजर आई वहीं जब उन्होंने तीन ताल में अपने नाना का खास ना धिं धिं ना बजाया तो कलाप्रेमियों ने मुक्त कंठ से तबले के इस उस्ताद का जोरदार सवागत किया, तबले पर बनारस की पूरी परंपरा को जिस शालीनता और कुलीनता से पं. रामकुमार ने मंच पर प्रदर्शित किया वह लाजवाब बन पड़ी। तबले पर उनकी उंगलियों की थिरकन वादन की उनकी विशिष्ट खूबसूरती केवल दर्शनीय थी वरन कौतूहल से भरी अदभुत लग रही थी। हारमोनियम में उतनी ही खूबसूरती से उनका साथ विवि के कलाकार शिव टांडिया ने दिया।

वायलिन की प्रस्तुति देती तीन पीढ़ियां।

सुजाता के आेडिसी नृत्य ने दर्शकों को रातभर बांधे रखा

वायलिनवादन के उपरांत ओडिसी की प्रख्यात नृत्यांगना सुजाता महापात्र की प्रस्तुति हुई। मंगलाचरण विष्णु वंदना के रूप मे भगवान जगन्नाथ से आशीर्वाद की आकांक्षी नर्तकी के रूप में उन्होंने आते ही अपनी विशिष्ट नृत्य शैली भाव भंगिमा से कलाप्रेमियों को उत्साहित कर दिया।

तीन पीढ़ियों ने दी एक साथ प्रस्तुति

तबलावादन के बाद वायलिन पर थ्री जेनरेशन कार्यक्रम के अंतर्गत पद्मविभूषण डॉ. एन राजम उनकी पुत्री डॉ. संगीता शंकर तीसरी पीढ़ी के रूप में उनकी दोनों नवासियों रागिनी शंकर नंदनी शंकर ने ऐसा राग छेड़ा कि तीन पीढिय़ों की एक मंच पर सामूहिक प्रस्तुति ने कलाप्रेमियों को गदगद कर दिया। तबले पर कोलकाता से पधारे फरूकाबाद घराने के कलाकार हिंडोल मजूमदार की संगत के साथ राग बागेश्वरी कान्हड़ा से कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए डॉ.एन राजम ने पहले मंच को संजोया फिर बारी-बारी से उनकी पीढ़ियों ने थ्री जेनरेशन कार्यक्रम की उपयोगिता को मंच पर बड़ी सुंदरता के साथ सकार किया। अंतिम प्रस्तुति के रूप में डॉ. राजम ने बेला पर अपनी सुप्रसिद्ध भजन रचना पायो जी मैंने राम रतन धन पायो की प्रस्तुति दी।