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बस्तर आर्ट के सभी हुए कायल

7 वर्ष पहले
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नगरवासियोंको बस्तर आर्ट से रूबरू कराने शबरी इंपीरियल की बस मंगलवार को नगर में पहुंची। बुधवारी स्थित रामजानकी मंदिर के पास प्रदर्शनी देखने कलाप्रेमियों की भीड़ लगी रही। बस में उपलब्ध कलाकृतियां देखने वालों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करने वाली हैं।

कलात्मक वस्तुओं की परख एक कला प्रेमी अच्छे से कर सकता है। मंगलवार को यहां पहुची बस में नगरवासियों को देखने के लिए एक से बढ़कर एक आर्ट सुलभ हैं। बेलमेटल, रॉट आयरन, बैम्बू क्राफ्ट, कोसा की साड़ी, लौकी की लैम्प सेट लोगों को खूब भा रही है। प्रदर्शनी में उपलब्ध सामग्री घरों की सजावट के उपयोग में काम आने योग्य हैं। अधिकांश लोग इसी मंशा से प्रदर्शनी देखने पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी संचालन का दायित्व देख रही टीम बस्तर आर्ट की खूबियां पूरे देश के लोगों में स्थापित करने के उद्देश्य से निकले हैं। नगर में यह टीम 26 सितंबर तक यहां के लोगों में बस्तर आर्ट की छाप छोड़ने उपलब्ध रहेेंगे। टीम में शामिल किशुन मंज, राजेश मजहर खान ने बताया कि बस रायपुर से निकली है। जो देश के अलग-अलग प्रांतों में जाएंगे। यह प्रयास छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड ग्रामोद्योग विभाग की ओर से किया गया है। चलित वैन (मोबाइल इंपोरियम) में ग्रामीण हस्त शिल्पियों द्वारा निर्मित सामग्री का विक्रय सह प्रदर्शन के लिए देश के प्रमुख शहरों में ले जाया जा रहा है। इसी तहत 10 िदन तक नगर में प्रदर्शनी संचालित की जा रही है। मिंज ने बताया कि कोरबा से यह बस वापस रायपुर रवाना होगी। जहां से कलाकृतियां बस में लेकर उड़ीसा के लिए रवाना होगी। प्रदर्शनी में वाल हैगिंग, शो-पीस, आदिवासी वनवासी की प्रतिमाएं, डोकरा आर्ट, डोर हैण्ड की अनेक रेंज है।

क्या है इसमें खास

प्रदर्शनीमें बस्तर की संस्कृति को दर्शाने वाले आर्ट की बहुलता है। हरेक आर्ट बस्तर की वास्तविकता को बयां करने वाले हैं। आदिवासी परंपरा, पशु पक्षियों, मानवीय पहचान के साथ उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं की भरमार है। हरेक आकृति में वहां की लोक संस्कृति की पहचान छिपी हुई है। परंपरागत उपयोग के साथ जीवन का हकीकत कला में निहित है।

कला पारखी हैं यहां के लोग

किसुनमिंज ने बताया कि मंगलवार को दोपहर 2 बजे प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। यहां के लोग कला पारखी हैं, यह यहां के लोगों से दो घंटे के दौरान मिले प्रतिसाद से साबित होता है। उन