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आराधना का बेहतर माध्यम गरबा

7 वर्ष पहले
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अगरआप गरबा डांडिया के शौकीन हैं तो इन स्थानों पर जाकर देवी आराधना में शामिल हो सकते हैं। नगर में टीपीनगर स्थित पाटीदार भवन, डीडीएम मार्ग स्थित जलाराम मंदिर परिसर, सीएसईबी पूर्व गरबा मैदान में गुजराती समाज के लोगों की विशेष उपस्थिति रहती है। एमपीनगर दशहरा मैदान, राजेन्द्र प्रसाद फेस-वन ग्राउंड, शिवाजीनगर, रविशंकर शुक्ल नगर, शारदा विहार कालोनी, इंदिरा विहार कालोनी में प्रतियोगिता के साथ डांडिया खेलकर एंज्वाय किया जा सकता है। इन स्थानों पर पहुंचने वाले लोग रात 8 बजते ही गरबा डांडिया के रंग में रंग जाते हैं। शहर के इन प्रमुख स्थलों के अलावा जहां-जहां देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं हर जगह गरबा डांडिया की धूूम बनी हुई है। इससे उपनगरीय क्षेत्र भी अछूता नहीं है। एनटीपीसी, बालको, कटघोरा, गेवरा-दीपका में आकर्षण बना हुआ है।

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फोटो : संदीप शर्मा

शहरवासियों ने अपनाया संस्कृति

दुर्गापूजा दशहरा उत्सव समिति के कोसाबाड़ी के अध्यक्ष ठाकुर छन्नू सिंह का कहना है कि शहरवासियों ने राजस्थान गुजरात की गरबा डांडिया संस्कृति को तेजी से अपनाया है। जिसका परिणाम है कि आज नगर में हर मोहल्ले की आयोजन समितियों द्वारा गरबा डांडिया उत्सव का आयोजन उत्साह से किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस संस्कृति में छिपी देवी पूजन महत्ता भी एक कारण है।

यूथका सपोर्ट, मिली पहचान

शिवाजीनगरगरबा-डांडिया उत्सव समिति की संस्थापक सदस्य धनगौरी पंचाल के साथ आयोजन में युवाओं का सपोर्ट हमेशा रहा है। कालोनी के हर परिवार का एक एक सदस्य समिति से निष्ठापूर्वक जुड़कर काम करते रहा है, जिसकी वजह से आज शिवाजीनगर के आयोजन की नगर में अलग पहचान बनी हुई है। ऐसा कहना है कि समिति से जुड़ीं मन्नू देवड़ा का। उन्होंने कहा कि आज के चकाचौंध जीवन मेें सही गलत का फैसला नहीं कर पाते बावजूद इसके इस समिति से जुड़े युवाओं की उत्सव में अहम भूमिका सकारात्मक होती है। यह देवी कृपा ही है कि आज अरसे से यहां गरबा डांडिया में माहौल रहता है।

परिधान में झलकता है संस्कार

सीएसईबीकोरबा पूर्व गरबा डांडिया उत्सव समिति के महेश पटेल का कहना है कि गरबा डांडिया में भाग लेने वाले प्रतिभागी का परिधान उनके संस्कार प्रदर्शित करते हैं। फैशन की दुनिया चाहे कितनी भी उंचाईयां छू ले लेकिन गरबा डांडिया में पारंपरिक परिधानों की अलग अहमियत होती है। यह आयोजन के द