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भलपहरी के मंदिर में कुत्ते के पिल्ले की बलि!
उरगाके भलपहरी गांव में बुधवार की सुबह तालाब के किनारे स्थित शिव मंदिर में कुत्ते के पिल्ले का शव मिला। ग्रामीणों ने इसे बलि समझा और वे आक्रोशित हो गए। इससे तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर उरगा थाना क्षेत्र में भलपहरी गांव है। गांव की जनसंख्या लगभग 9 सौ है। गांव के मुड़ा तालाब के समीप छोटा सा शिव मंदिर स्थित है। करीब 1 साल पहले इस मंदिर को सरपंच ओमशंकर सिंह कंवर के परिवार ने बनवाया था। तब से ग्रामीणों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी है। बुधवार की सुबह करीब 7 बजे तालाब की ओर पहुंचे ग्रामीणों ने मंदिर में शिवलिंग के सामने छत्र के नीचे कुत्ते के पिल्ले का शव देखा। इसकी जानकारी सरपंच के घर में दी गई। थोड़ी देर में गांव में यह बात फैल गई और मौके पर भीड़ जुट गई। किसी के द्वारा कुत्ते की बलि दी है, ऐसा समझकर लोग आक्रोशित हो गए। इससे गांव में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। सरपंच ओमशंकर सिंह ने इसकी सूचना उरगा पुलिस को दी।
सूचना मिलने पर थाना प्रभारी एसके पाठक स्टाफ समेत भलपहरी पहुंचे। जहां ग्रामीणों से जानकारी लेने के बाद उन्होंने इस मामले में जांच करने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया। ग्रामीण शांत जरूर हो गए लेकिन उनमें आक्रोश है। पुलिस ने मौके पर पंचनामा कार्रवाई कर उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए पशु चिकित्सालय भेज दिया।
गांव में काला पिल्ला नहीं था
मंदिर के समीप रहने वाले जवाहर लाल यादव ने बताया कि जिस पिल्ले का शव शिवमंदिर में मिला है वह पूरी तरह से काला है। ऐसा पशु तंत्र-मंत्र वालों द्वारा बलि के लिए उपयोग में लाया जाता है। घटना से पहले गांव में काला पिल्ला नहीं था।
इसलिए पिल्ले को किसी के द्वारा बाहर से लाकर वहां रखा गया है। नींबू-मिर्ची मिलने से साफ है कि उसकी बलि दी गई है।
निमोनिया से हुई मौत
इसी मंदिर में मिला पिल्ले का शव।
बलि के संदेह पर पिल्ले का कराया पोस्टमार्टम
मंदिर में कुत्ते के पिल्ले का शव मिलने के बाद ग्रामीण इसे बलि बता रहे थे। इसके लिए उरगा थाना प्रभारी एसके पाठक ने पिल्ले की मौत स्वाभाविक है या फिर किसी ने उसे मारकर मंदिर में रखा है इसके लिए शव का पोस्टमार्टम भी कराया। वहीं पोस्टमार्टम के बाद पिल्ले के शव का कफन-दफन भी कर दिया गया। जिले में यह पहला मौका