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सौ से ज्यादा मामले में बिसरा जांच पेंडिंग

6 वर्ष पहले
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जिलेभर से पिछले कुछ वर्षो के दौरान फारेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे गए बिसरा में 118 अब तक पेंडिंग है। हालांकि इन सभी केस में बिसरा जांच निरर्थक होने की वजह से अब तक पेंडिंग होना बताया गया है।

जिला गठन के बाद से अब तक जिले के सभी थाना और चौकी क्षेत्र में घटना-दुर्घटना के मामलों में एफएसएल (फारेंसिक) जांच के लिए बिसरा ब्लड सैंपल रायपुर स्थित फारेंसिक लैब भेजा जाता था। जहां जांच में देरी होने की वजह से मामला पेंडिंग रह जाता है। अब तक जिले से डेढ़ सौ से अधिक पेंडिंग मामले थे। लेकिन जिले में फारेंसिक मोबाइल यूनिट शुरू होने के बाद पेंडिंग मामलोंे के निराकरण के लिए प्रयास तेज किया गया। इसमें से अधिकांश मामले जिनमें एफएसएल जांच जरूरी थी उसमें जांच पूरी कर ली गई। वर्तमान में करीब 118 केस में एफएसएल जांच पेंडिंग है। हालांकि फारेंसिक मोबाइल यूनिट के मुताबिक इन सभी पेंडिंग मामलों में बिसरा जांच निरर्थक है। क्योंकि ये मामले स्वभाविक मौत, उपचार के दौरान मौत समेत स्पष्ट आत्महत्या के हैं। जिसमें बिसरा जांच रिपोर्ट की जरूरत ही नहीं है। ऐसे मामलों की लिस्टिंग कर नष्टीकरण की अनुमति के लिए फारेंसिक हेडक्वार्टर भेजी जाएगी। जहां से अनुमति मिलने पर बिसरा वापस मंगाकर नष्टीकरण की कार्रवाई पूरी की जाएगी।

यूनिट करेगी साइंटिफिक जांच

जिलेमें शुरू हुआ फारेंसिक मोबाइल यूनिट का कार्य घटना-दुर्घटना के बाद मौके पर साइंटिफिक जांच का होगा। मौत के सभी मामलों (मर्ग) समेत चोरी, लूट, डकैती, सस्पेक्टेट एक्सीडेंट, बर्निंग केस, अनाचार के मामलोें में फारेंसिक एक्सपर्ट घटनास्थल पर पहुंचकर बारिकी से जांच करते हुए साक्ष्य जुटाऐंगे। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी वह जुटाने का प्रयास करेंगे। आमतौर पर पुलिस जांच में इस तरह के साक्ष्य सामने नहीं पाते हैं।

क्यों जरूरी है एफएसएल जांच

घटना-दुर्घटनाया किसी बड़ी वारदात के बाद आमतौर पर स्थानीय पुलिस या विशेष टीम मौके पर पहुंचकर जांच करती है। इसके अलावा सुराग के लिए पुलिस डॉग की मदद ली जाती है। इस जांच में साइंटिफिक सुराग जो सामान्य तौर पर नजर नहीं दिखते वह छूट जाते हैं। इसलिए फारेंसिक एक्सपर्ट द्वारा मौके पर पहुंचकर एफएसएल जांच कर ऐसे सुराग तलाशते हंै। इसके अलावा संदिग्ध मौत के मामलों में जांच के लिए बिसरा भेजे जाती है।

जांचपेंडिंग होने का क्या असर

एफएसएलजांच पेंडिंग होने की वजह से कई मामलों की जांच अपूर्ण रहती है। खासकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस को बिसरा के जांच रिपोर्ट का इंतजार रहता है। कई बार जांच रिपोर्ट के लिए पुलिस को चक्कर लगाना पड़ता है। जांच के दौरान मौत स्वाभाविक होने का पता चलने के बाद भी एफएसएल जांच के इंतजार में ऐसे मामलों का खात्मा-खारिजी नहीं हो पाती है। कोर्ट में भी एफएसएल रिपोर्ट मिलने में देरी होने से सुनवाई में देरी हाेती है।

इस तरह होगी नष्टीकरण

फारेंसिकमोबाइल यूनिट द्वारा सभी पेंडिंग मामलों की फाइल का परीक्षण किया गया है। इसमें निरर्थक या औचित्यहीन मामले जिसमें एफएसएल जांच के लिए बिसरा भेजा गया है उसकी पहचान की गई है। अब यूनिट द्वारा ऐसे मामलों में बिसरा नष्टीकरण की अनुशंसा करते हुए मुख्यालय से अनुमति ली जाएगी। अनुमति मिलने पर एसडीएम द्वारा बिसरा नष्टीकरण की कार्रवाई पूरी होगी।

बिलासपुर में शुरू होगा रीजनल लैब

जिलेमें शुरू हुए फारेंसिक मोबाइल यूनिट ब्लड और बिसरा की जांच नहीं होगी। बल्कि यहां से जांच के लिए ब्लड-बिसरा फारेंसिक लैब भेजा जाएगा। इसके लिए जल्द ही बिलासपुर में रीजनल फारेंसिक लैब शुरू होगा। जहां रेंज के सभी जिलों से बिसरा जांच के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में रायपुर स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। जिले में फारेंसिक का मोबाइल यूनिट और बिलासपुर में लैब शुरू होने से एफएसएल जांच जल्द होगी।

निरर्थकबिसरा का होगा नष्टीकरण

^जिन मामलों में बिसरा जांच जरूरी था। उनमें जांच पूरी हो गई है। वर्तमान में 118 केस में बिसरा जांच औचित्यहीन है। आवश्यकता नहीं होेने के बाद भी बिसरा जांच के लिए भेज दिया गया है। ऐसे मामलों के बिसरा का नियमानुसार नष्टीकरण किया जाएगा। पीएसभगत, वैज्ञानिक अधिकारी, फारेंसिक मोबाइल यूनिट कोरबा