50 साल बाद भी वहीं औषधालय
पशुचिकित्सा विभाग का ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कितना लाभ मिलता है यह कहना आसान नहीं होगा। पर गांव के लोगों को सुविधा आज भी पुराने ढर्रे पर ही मिल रही है। तय सीमा में आने वाले गांवों की आबादी के साथ पशुओं की भी संख्या बढ़ना लाजमी है। इसके बाद भी विभागीय सुविधाओं के उन्नयन की दिशा में ठोस पहल नहीं होना गांवों में संचालित पशु औषधालय इसके गवाह हैं।
विकास खंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पंचायत कोरबी में कहने को तो आज से 50 साल पहले 10 मार्च 1965 में पशु विभाग ने पशु औषधालय खोल रखे हैं। खपरैल की छत के नीचे दो कमरों वाले भवन इस भवन की वास्तविकता समझी जा सकती है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को उन्नति की राह पर ले जाने प्रारंभ की गई पहल नि:संदेह सराहनीय है, किन्तु जो सुविधा वर्षों पूर्व थी वहीं आज भी रहे यह विकास के दावे पर दाग हो सकती है। जिस गांव में औषधालय संचालित है वहां अन्य विभागीय सुविधाओं में तेजी से विस्तार हुआ है, जिसका लाभ गांव के लोगों को मिल रहा है। नहीं मिल रहा है तो केवल पशु विभाग के उस घिसे पिटे पुराने ढर्रे पर चलने वाले पशु औषधालय से। 10 मार्च को 50 साल पूरा होने पर गोल्डन जुबली मनाएगा। आबादी के लिहाज से ग्रामीणों को आर्थिक उन्नति की ओर ले जाने के लिए पशु औषधालय के स्थान पर पशु चिकित्सालय की जरूरत महसूस की जा रही है। 24 अप्रैल 1984 से यहां सहायक पशु चिकित्सा अिधकारी की भूमिका निभा रहे बीआर उरांव पशु परिचारक धरम सिंह कंवर के साथ मिलकर 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 25 गांव के लोगों को विभागीय सुविधाओं का लाभ दे रहे हैं। पशु पालन से लेकर उपचार तक की सुविधा इन दोनों के कंथे पर अब तक टिकी हुई है।
ये गांव आते हैं दायरे में
कोरियाजिला, पसान क्षेत्र केंदई से लगे 25 गांव औषधालय के दायरे में आते हैं। जो अपने स्थापना काल से ही कोरबी सहित दुल्लापुर, पाली, खम्हारमुड़ा, कुरथा, बूढ़ापारा, कुल्हरिया, झिनपुरी, सरमा, सुखरी ताल, फुलसर, मिसिया, रोदे, बनिया, पोड़ी खुर्द, लाद, जजगी, घुंचापुर, सखोदा, भुजुंग कछार, लालपुर, चोटिया, परला, लमना, कापा नवापारा के ग्रामीणों को विभागीय योजनाओं का लाभ मिलता है।
प्रारंभसे ही दो ही स्टाफ
पशुऔषधालय के खुलने के साथ ही स्टाफ के नाम पर एक सहायक पशु चििकत्सा अधिकारी तो एक पशु परिचारक नियुक्त है। हालांकि शेष अन्य औषधालयों में भी स्टाफ की यहीं स्थिति है। विभाग से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ सही ढंग से ग्रामीणों को मिले, इसलिए स्टाफ बढ़ाने की जरूरत है।
1965 से इस भवन में संचालित पशु औषधालय
तो पशु चिकित्सा अिधकारी देंगे सेवा
^पशुचिकित्सा का दर्जा ग्रामीण अंचल में संचालित पशु औषधालयों को अब तक नहीं दिया जा सका है। पशु चिकित्सालय मिलने से सहायक पशु चिकित्सक के स्थान पर पशु चिकित्सक की ड्यूटी लगाई जाएगी, साथ ही सहायक पशु चिकित्सक अन्य स्टाफ बढ़ाने होंगे। बीआरउरांव, सहायक पशु चिकित्सािधकारी, कोरबी
अब तक नहीं तैयार हो सका है भवन
पशुऔषधालय के नए भवन के लिए बीते पंचवर्षीय में ही 5 लाख रुपए की स्वीकृति मिल गई है। भवन का निर्माण भी शुरू हो गया है। आधा अधूरा भवन का निर्माण कार्य फिलहाल बंद पड़ा है। भवन कब बनकर तैयार होगा इस संबंध में कुछ कह पाना मुश्किल है।