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यात्रियों से किराए के नाम पर लूट, परिवहन विभाग की छूट

6 वर्ष पहले
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जिलेसे बाहर या नगर में बस या आटो में सफर करना लोगों के लिए चुनौती बन गया है। बस, मिनी बस या फिर आटो में ही क्यों सफर करना पड़े, लोगों को मुंह मांगा किराया ही देना पड़ता है। इसके लिए अगर कोई बहस भी करना चाहे तो उनसे पार पाना आसान नहीं रह गया है। मानो किराए के नाम पर बस आटो वालों को परिवहन विभाग ने छूट दे रखा हो।

परिवहन विभाग ने किराया के लिए मापदंड तय कर रखा है। जिसका पालन भी फाइलों तक ही सीमित है। किराया सूची सभी लंबी दूरी की बस, मिनी बसों में चस्पा किए जाने की अनिवार्यता है। यह निर्देश आटो वालों के लिए भी है। हालत यह है कि आज सभी बसों से किराया सूची गायब हो चुकी है।

वहीं आटो में सफर करने वालों की सुविधा के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या फिर प्रमुख चौराहों पर किराया सूची को प्रदर्शित करने वाले बोर्ड हुआ करते थे। जो अब कहीं नहीं दिखते। इसका सीधा फायदा आटो चालक सफर करने वालों से वाजिब किराए से अधिक वसूल कर उठाने में मशगूल हैं। इस दिशा में परिवहन विभाग यातायात विभाग भी कार्रवाई करने के बजाय शांत बैठा हुआ है। जिसके कारण सफर करने वालों की जेब हल्की हो रही है।

तय किराया नहीं लेने वालों पर होगी कार्रवाई

^बस आटो का किराया तय है। अगर इसका उल्लंघन बस या आटो चालक करते हैं तो यह यात्रियों के साथ अन्याय है। जिसके खिलाफ यातायात पुलिस के साथ परिवहन विभाग मिलकर कार्रवाई करेगा। पीआरनेताम, डीटीओ, कोरबा

प्रथम 5 किलोमीटर का 5 रुपए किराया

लंबेसमय से किराया के नाम पर चल रहे लूट का खेल कभी बंद होगा या नहीं इस दिशा में कोई अभियान चलाने के बजाय जिला परिवहन विभाग में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी कहते हैं कि बसों का किराया तय है। प्रथम 5 किलोमीटर का 5 रुपए और उसके प्रति किलोमीटर का 80 पैसे सफर करने वाले को देना होता है। सच्चाई यह है कि बस मालिक हों या आटो चालक सभी अपने हिसाब से किराया तय कर रखे हैं।

जयनारायण, राजेश पाण्डेय।

प्रशासन को होना होगा सख्त

नगरके कुछ लोगों से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने भी इस बात से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन को सख्त होना चाहिए। ताकि लोगों की जेब किराए के नाम पर काटी जाए। इस संबंध में टीपीनगर निवासी जयनारायण अग्रवाल, बालको निवासी राजेश पाण्डेय पुरानी बस्ती के दीपक साहू ने बताया कि आटो चालकों मिनी बस वालों की मनमानी रोकने ठोस कदम उठाने होंगे। आटो मिनी बस बस चालकों ने स्वयं किराए का निर्धारण कर लिया है। नियमानुसार किराया नहीं लिया जाता है। सर्वाधिक परेशानी आटो में सफर करने पर होगी। ट्रेन पकड़नी हो या स्टेशन से वापस घर पहुंचना होगा। नगर से सटे इलाकों में भी जाना हो तो आटो में डेढ़ से दो सौ रुपए किराया देना पड़ता है। वहीं एक चौक से दूसरे चौक पर जाने के लिए कम से कम 10 रुपए देने पड़ते हैं। किराए के नाम पर अक्सर सवारी वाहन चालकों के बीच विवाद की स्थिति बनती रहती है। खासकर यह समस्या आटो में स‌फर करने वालों के साथ अधिक होती है। ऐसे विवाद में फंसने वाले लोग समयाभाव के कारण कार्रवाई कराने के लिए कुछ नहीं कर पाते। यात्रा में जाने वाले लोग इससे बचते हुए निर्धारित किराए से अधिक देकर चलते बनते हैं।

बाहर लटकते रहते हैं लोग

नगरमें यह एक गंभीर समस्या बनी हुई है। चाहे शहर के अंदर चलने वाले सवारी आटो हों या फिर कोरबा-चांपा मार्ग पर दौड़ने वाली जीप या मिनी बस। सभी को एक निश्चित संख्या में ही सवारी बैठाने का प्रावधान है। लेकिन ऐसा कभी कभार ही देखने को मिलेगा। आटो वाले 3 के बजाय 7 से 10 लोगों तक को बैठा लेते हैं तो जीप वाले 5 के स्थान पर 10 से 15 सवारी के लेकर बेखौफ दौड़ते हैं। जहां तक बस की बात करें तो सवारियों की गणना करना मुश्किल हो जाएगा। यात्रा करने वालों की जान को जोखिम डालकर चालक अपनी जेब भरने की जिद नहीं छोड़ते।

रातमें आटो, लोगों के लिए बड़ी मुसीबत

रातके समय रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पहुंचने वाले नगरीय उपनगरीय क्षेत्र के यात्रियों के आटो में सफर करना मतलब मुसीबत मोल लेने के समान है। क्योंकि दिन में किराया के नाम पर यात्रियों से अधिक वसूली हो रही है तो रात के समय में क्या होता होगा समझा जा सकता है। रात के समय आटो वाले किराया जस्ट डबल कर देते हैं। चाहे संयुक्त रूप से सफर करें या फिर बुकिंग कर सेल्फ। इसका विरोध काफी समय से चले रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।

बस जिसमें नहीं लगी है किराया सूची, क्षमता से अधिक सवारी लेकर चलता आटो चालक।