वाई-फाई हुआ हवा-हवाई
तकनीकी कालेजों में वाइ-फाई की अनिवार्यता के बावजूद आईटी कालेज कोरबा के छात्रों को इसकी सुिवधा से नहीं मिल रही है। गिनती के ही छात्र-छात्राओं को इसकी सुिवधा मिल रही है, वह भी उनके लैपटॉप पर नहीं वरन डेस्कटॉप पर। ऐसे में कैम्पस के अंदर कहीं भी इंटरनेट के जरिए दुिनयाभर की तकनीकी जानकारी से कनेक्ट होने का दावा हवा हवाई साबित हो रहा है।
कालेज संचालन समिति ने दो साल पहले कालेज प्रबंधन को वाइ-फाई कनेक्टिविटी के िलए 10 लाख रुपए की स्वीकृति दी थी। कालेज प्रबंधन का कहना है कि कालेज परिसर में 10 एमबीपीएस क्षमता की इंटरनेट सुिवधा के िलए करीब ढाई लाख की लागत से प्रबंध किया गया। स्थापित की गई तकनीक में शुरू से ही कुछ खामियां होने की वजह से सीिमत दायरे में ही वाइ-फाई कनेक्टिविटी काम करती है। इसमें सुधार के िलए उच्च प्रबंधन को अवगत कराया गया है। छात्र-छात्राओं ने भी वाइ-फाई सुिवधा शत-प्रतिशत उपलब्ध कराने कालेज प्रशासन को आवेदन िकया था। छात्रों का कहना है कि वे अपनी समस्या लेकर कालेज प्रशासन को कई बार चिट्ठी लिख चुके हैं, बावजूद इसके उनकी समस्या बरकरार है।
क्यों जरुरी है वाई-फाई
इंजीिनयरिंगके क्षेत्र में हर रोज नई खोज आविष्कार होते रहते हैं। ऐसे में नई तकनीक से लगातार रूबरू होते रहना इंजीनियर्स के लिए जरूरी है। दुिनया भर में चल रहे नए प्रयोगों आिवष्कारों की जानकारी सीधे इंजीिनयरिंग छात्रों के लैपटॉप में उपलब्ध हो इसके लिए एक ओर शासन ने उन्हें इसकी सुिवधा मुफ्त उपलब्ध कराई है तो दूसरी ओर तकनीकी विश्वविद्यालय ने कालेजों में ई-लाइब्रेरी की सुिवधा भी अनिवार्य कर रखा है। नियमित वाइ-फाई की सुिवधा नहीं होने की वजह से विभिन्न जानकारियों के िलए छात्रों को कालेज के डेस्क टॉप कम्प्यूटर के भरोसे रहना पड़ता है।
250 छात्रों को मुफ्त मिला लैपटॉप
बड़ेशहरों के अिधकांश िनजी इंजीिनयरिंग कालेजों में लैपटॉप का इस्तेमाल अिनवार्य है। कई कालेज स्वयं छात्र-छात्राओं की फीस में शामिल करते हुए लैपटॉप उपलब्ध कराते हैं। इंजीिनयरिंग में अध्ययनरत लगभग 250 छात्र-छात्राओं को गत वर्ष राज्य शासन की ओर से तकनीकी जानकारी के लिए मुफ्त लैपटॉप बांटा गया था। सूचना के युग में इंजीनियरिंग के छात्र पीछे रह जाएं इसके मद्देनजर खासतौर पर सूचना शक्ति योजना के तहत उन्हें इसकी सुिवधा दी गई थी। बगैर इंटरनेट के लैपटॉप का