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मेडिकल वेस्ट के लिए प्लांट जरूरी

6 वर्ष पहले
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बायोमेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल के लिए संबंधित ठेका कंपनी को प्लांट लगाना होगा। उनकी 24 एकड़ जमीन की मांग को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासन ने सख्त लहजे में कहा है कि वे प्लांट लगाने की कार्रवाई करे ताकि डिस्पोजल सही ढंग से किया जा सके।

कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में अस्पतालों से निकलने वाली बायो मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल के लिए उठाए जाने वाले कदम को लेकर बैठक हुई। जिसमें विभागीय अधिकारियों के अलावा सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इस दौरान बताया गया कि जिले के 60 अस्पतालों से रोजाना निकलने वाले मेडिकल वेस्टेज को बरबसपुर स्थित डंपिंग यार्ड ले जाकर डिस्पोजल करने की जिम्मेदारी एनवायरी केयर लिमिटेड नामक ठेका कंपनी को दी गई है। प्रशासन के साथ इस कंपनी ने वर्ष 2007 में अनुबंध किया है। उनकी मांग के अनुरूप जमीन उन्हें उपलब्ध कराया गया है।

फिलहाल कंपनी के द्वारा इस जमीन में गड्‌ढे कर वेस्ट मटेरियल को इसमें डालकर मिट्‌टी से पाटने का कार्य कर रहा है। अब जमीन की कमी सामने आने के कारण ठेका कंपनी के द्वारा 24 एकड़ जमीन की मांग की गई। इसी मामले को लेकर बैठक आयोजित किया गया था। कंपनी का तर्क है कि इससे वे 30 वर्ष तक डिस्पोजल का काम कर सकेंगे। लेकिन इस दौरान कलेक्टर ने अस्पताल स्वास्थ्य केन्द्रों से उत्सर्जित बायो मेडिकल के निष्पादन की वर्तमान व्यवस्था पद्धति की जानकारी ली। निगम आयुक्त आलोक चंद्रवंशी ने बताया कि डीप वेरियल पद्धति से वर्तमान में डिस्पोजल का कार्य किया जा रहा है। लेकिन यह पद्धति समुचित निष्पादन की उत्तम पद्धति नहीं होने के कारण मानक के अनुरूप निष्पादन नहीं हो पा रहा है। इसके लिए इंसीनेटर लगाने की जरूरत है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. पीएस सिसोदिया ने भी वर्तमान पद्धति को अनुचित बताया। बैठक में सीएमएचओ डॉ. पीआर कुंभकार, पर्यावरण संरक्षण मंडल के एसके उइके, संबंधित ठेका कंपनी से संदीप कुमार सिंह, सेमुअल दास, एसईसीएल के सीएमओ डॉ. जेके पुजारी, बालको पर्यावरण विभाग के प्रियरंजन त्रिवेदी, डॉ. एस कुमार, एसईसीएल के डॉ. अविनाश तिवारी, सीएसईबी से डॉ. एमआर डॉ. यूके बेहरा, निगम के स्वास्थ्य अधिकारी वीके सारस्वत भी उपस्थित थे।

हिदायत