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कोरबा पूर्व प्लांट की 120 मेगावाट यूनिट ट्रिप
कोयलासंकट से जूझ रहे प्लांटों की हालत गड़बड़ाने से प्रदेश में िबजली आपूर्ति को लेकर भी दबाव बढ़ने लगा है। तकनीकी कारणों से बंद हुई एचटीपीपी कोरबा पूर्व की दो यूनिट को सुधार लिया गया है। लेकिन इसके बाद कोरबा पूर्व की 120 मेगावाट की यूनिट से उत्पादन ठप हो गया है। िजसे सुधारने का प्रयास जारी है।
राज्य पावर जनरेशन कंपनी पर बिजली की अापूिर्त को लेकर इन दिनों भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। एक दिन पहले प्लंाट की दो यूनिट के टि्प होने से प्रदेश में 200 मेगावाट तक बिजली की कमी हो गई थी। जिसमें सुधार के बाद िस्थति को कुछ बेहतर किया जा सका था। लेिकन कोरबा पूर्व प्लंाट की 120 मेगावाट के एक यूनिट में फिर से खराबी आने से िस्थति खराब हो गई थी। रविवार को मौसम में बदलाव के बीच बिजली की मांग में कुछ िगरावट देखने जरूर मिली। लेकिन इसके बाद भी प्लंाटों से उत्पादन को लेकर दबाव की िस्थति बनी रही। वर्तमान में जनरेशन कंपनी के प्लांटों में काेयला की कमी बड़ी परेशानी बनी हुई है। प्लांटों में रोज आने वाले कोयला के भरोसे ही बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
प्लांटों मे एक से दो दिनों का ही कोयला स्टॉक है। कोरबा पूर्व प्लांट के एक अिधकारी ने बताया कि 120 मेगावाट के यूनिट में तकनीकी खराबी है। िजसे जल्द सुधारने की कोशिश हो रही है। कोरबा पू्र्व प्लांट की इकाईयां काफी पुरानी हो चुकी है। इस लिहाज से यहां वर्तमान में बिंजली उत्पादन की िस्थति को बेहतर माना जा रहा है। फिलहाल यहां 50 मेगावाट के चारों 120 मेगावाट के एक अन्य यूनिट से बिजली का उत्पादन हो रहा है।
कम लोड पर प्रचालन
कोयलेकी कमी के कारण प्लांट की इकाईयों को कम लोड पर चलाया जा रहा है। रविवार की दोपहर बिजली की डिमांड कम जरूर थी। इन दिनों प्रदेश मेें बिजली की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए प्लंाटों से लगातार बिजली उत्पादन करने का भारी दबाव है। लेकिन कोयला की कमी के कारण एक ओर इकाईयों से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर इकाईयां को कम लोड पर चलानी पड़ रही है। इससे कंपनी को भारी उत्पादन क्षति झेलना पड़ रहा है।
बांगोहाइडल से 40 मेगावाट उत्पादन
रविवारकी दोपहर प्रदेश में बिजली की मांग 2500 मेगावाट तक थी। लेकिन शाम होते तक डिमांड 2700 मेगावाट तक पहुंच गई थी। वही उपलब्धता 2650 मेगावाट तक रही। मौसम में बदलाव के कारण बिजली की मांग पिछले दिनों की अ