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पेंशन ग्रेच्युटी भुगतान मिलने में आडिट बना रोड़ा
कोरबा | नगरनिगम के अिधकारी-कर्मचारियों को आडिट विभाग के कारण अनेक विभागीय लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। दर्जनों तो ऐसे हैं जो रिटायर हो चुके हैं और उन्हें ग्रेच्युटी पेंशन का भुगतान तक नहीं मिल पा रहा है। अब तो विभाग का कार्यालय यहां से हटाकर रायगढ़ भेजने की तैयारी चल रही है। जिले में 2005 से आडिट डिपार्टमेंट का कार्यालय संचालित है। उप संचालक स्तर से अिधकारी की पदस्थापना भी की गई है।
6 माह पहले हुए स्थानांतरण के बाद यहां पूर्णकालिक उप संचालक की पदस्थापना नहीं की है। रायपुर में पदस्थ उप संचालक भारती सिंह राजपूत को इस जिले का प्रभार दिया गया है। इसके बाद से ही आडिट के कार्याें की गति धीमी हो गई है। राज्य शासन ने ज्यादातर स्वत्वों के भुगतान के लिए दस्तावेजों के आडिट को अनिर्वाय कर दिया गया है। ऐसे में अिधकारी कर्मचारियों का हितलाभ सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। नगर निगम के अलावा दूसरे विभागों की भी लगभग यही स्थिति है। आडिट के लिए विभाग के दस्तावेजों का भंडार सा लगने लगा है। लंबित मामलों की संख्या ज्यादा होने के कारण इसका निपटारा कर पाना भी अब विभाग के लिए आसान नहीं रह गया है। शेषपेज 12
वैसेभी पहले से ही विभाग में अपडेटर की कमी बनी हुई है। ऐसे में कम अमले से पिछले कई माह का लंबित कार्य कर पाना विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। उप संचालक के रायपुर मुख्यालय में होने के कारण वैसे भी आडिट कार्य की गति पहले से ज्यादा धीमी हो गई है। उप संचालक भारती सिंह राजपूत से चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
पेंशनका भुगतान रूका
नगरनिगम के दर्जनभर से ज्यादा अिधकारी-कर्मचारी रिटायर हो गए हैं। विभाग से उन्हें ग्रेच्युटी की राशि पेंशन का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में विभागीय सूत्र बताते हैं कि उनका सर्विस बुक आडिट के लिए विभाग को 6 माह पहले भेजा गया है। लेकिन अब तक तो आडिट रिपोर्ट मिला है और ही सर्विस बुक।
वेतनमान के लाभ से वंचित
नगरनिगम के अिधकारी कर्मचािरयों को समय मान वेतन मान देने की मंजूरी विभाग ने दी है। प्रतिमाह एक हजार रुपए से डेढ़ हजार रुपए का लाभ उन्हें इससे मिलेगा। लेकिन उनके सर्विस बुक का आडिट हो पाने के कारण मिलने वाला लाभ उनके वेतन में जुड़ नहीं पाया है। कब तक आडिट हो पाएगा इस संबंध में भी विभाग कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं है।