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सिंचाई विभाग ने एएलसी के आदेश के बाद भी नहीं किया भुगतान
सहायकश्रम आयुक्त एवं न्यायालय नियंत्रण प्राधिकारी उपादान भुगतान अधिनियम 1972 द्वारा जारी आदेश का भी सिंचाई विभाग ने पालन करना जरूरी नहीं समझा। इस न्यायालय ने विभाग में कार्यरत चौकीदार उदयभान जायसवाल के मामले की सुनवाई करते हुए 30 दिन के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी वह ग्रेच्युटी के लिए भटकने को विवश है।
उदयभान जायसवाल सिंचाई विभाग के सब डिवीजन 15 माचाडोली में चौकीदार के तौर पर 1982 से कार्यरत था। 31 जुलाई 2001 को वह 29 साल की सेवा के बाद रिटायर हो गया। ग्रेच्युटी भुगतान के लिए वह अनुविभागीय कार्यालय से लेकर राज्य कार्यालय तक आवेदन देता रहा। लेकिन 2011 तक यह भुगतान विभाग ने नहीं किया। तब उसने संबंधित न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया।
सुनवाई में न्यायालय ने पाया कि विभाग ने भुगतान के तथ्य का आंशिक विरोध करते हुए कहा कि राज्य शासन के परिपत्र के अनुसार उन्हें ग्रेच्युटी की पात्रता नहीं है। लेकिन न्यायालय ने दस्तावेजों के अवलोकन प्रस्तुत तर्कों में पाया कि उदयभान ने 29 साल लगातार सेवाएं दी है। इसलिए वह ग्रेच्युटी की पात्रता रखते हैं। इसलिए विभाग 30 दिन के भीतर राशि का भुगतान करे। सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता से चर्चा करने का प्रयास कियाा गया। लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
जिम्मेदारी सरकार की होगी
पीड़ितउदयभान ने बताया कि सरकार वृद्धा पेंशन का दावा करती है। लेकिन उन्हें तो 29 साल की सेवा के एवज में पात्र होने के बाद भी ग्रेच्युटी की रकम का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उसे दिल का दौरा भी चुका है। आिर्थक स्थिति खराब होने और ज्यादा उम्र होने के कारण अक्सर तबियत खराब रहती है। अगर उन्हें इलाज के अभाव में कुछ होता है तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार होगा।