छत्तीसगढ़ राज्य का अजमेर बना लुतरा शरीफ
आस्थाकी नगरी लुतरा शरीफ में उर्स के दौरान जायरीनों का तांता लगा रहा है। तीसरे दिन कोरबा, रायपुर, बिलासपुर, तखतपुर, जांजगीर चांपा से सैकड़ों दर्शनार्थी अकीदत की चादर चढ़ाने पहुंचते रहे।
शहंशाहे छत्तीसगढ़ की नगरी लुतरा शरीफ में रहमतों की बारीश हो रही है। बाबा के चाहने वालों का तांता लगा हुआ है वहीं दरगाह के गुम्बद शाही नुरानी मस्जिद के बुलंद गुम्बद की बैरूनी मंजर बाबा इन्सान अली शाह के अकीदत की रोशनी से नहाई हुई है। दरगाह इंतेजामिया कमेटी के संचालन प्रशासनिक देखरेख में व्यवस्था बनी हुई है। यहां पहंुचने वालों को हवाई झुला, मौत का कुंआ सहित स्टालों से मनोरंजन साथ जरुरी सुविधाएं मिल रही हैं। जगह-जगह पानी शरबत सहित शिरनी की व्यवस्था की गई है। दरबार के शाही लंगर में रोटी, सब्जी, आचार, हलुवा का आनंद 30 हजार जायरीनों ने लिया। रात में कव्वली का मुकाबला हुआ जिसमें बुलबुले बागे विलायत, शहंशाहे तरन्नुम अनीस रईस साबरी (दिल्ली) फहीम साबरी, गुलाम वारिस (बिजनौर) अपनी कव्वाली की फन प्रस्तुत किए। कव्वालों ने सूफियाना कव्वाली के अलावा देश की एकता अखण्डता पर भी नज्म सुनाकर कौमी एकता को और भी मजबूती प्रदान किए। बाबा इंसान अली के शान में भी कलाम पेश किया।
कार्यक्रम में भारत संचार निगम लिमिटेड के सीजीएम गनेश चन्द्र पाण्डेय रायपुर महाप्रबंधक बिलासपुर एंथोनी एक्का ने लुतरा शरीफ को छत्तीसगढ़ का अजमेर बताते हुए कहा कि बाबा इंसान अली का दरबार कौमी एकता का मिसाल प्रस्तुत करता है। हर धर्म के लोग अपनी अकीदत का गुलदस्ता पेश करतें है। इस अवसर पर हाजी अखलाक खान अध्यक्ष दरगाह इंतेजामिया कमेटी, सज्जादा नशीन हाजी मान खां, कारी शब्बीर अहमद जनरल सेक्रेटरी, खादीमान कमेटी के अनेक सदस्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम की प्रस्तुति देते कव्वाल।
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