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प्रमोशन में छूट गए शिक्षा विभाग के यूडीटी

7 वर्ष पहले
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आदिमजाति एवं अनुसूचित जाित विकास विभाग ने उच्च वर्ग शिक्षक से व्याख्याता पद के लिए पदोन्नति सूची जारी की है। इसमें राज्य भर के 1171 यूडीटी शामिल हंै। इनमें कोरबा के 339 यूडीटी के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च वर्ग शिक्षकों को इस पदोन्नति से वंचित कर दिया गया। जिससे इन शिक्षकों में काफी नाराजगी मायूसी साफ झलकने लगी है।

आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग का सेटअप लंबे समय से अलग रहा है। लेकिन पिछले चार साल से दोनों विभागों के बीच संविलियन को लेकर प्रक्रिया चल रही थी। राज्य में दोनों विभाग के मंत्री भी पहले अलग-अलग हुआ करते थे। लेकिन इस बार दोनों विभाग के मंत्री भी एक ही है। इससे उम्मीद की जा रही थी कि दोनों विभागों के बीच एका कायम हो गई है और राज्य स्तर पर होने वाली पदस्थापना, पदोन्नति, क्रमोन्नति में दोनों विभाग के शिक्षक कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। लेकिन 2 दिसंबर को जो पदोन्नति सूची जारी की गई है, वह आदिम जाति अनुसूचित विभाग के आयुक्त के हस्ताक्षर से जारी हुई है और इसमें इसी विभाग में पदस्थ यूडीटी के नाम शामिल किए गए हंै। लेकिन शिक्षा विभाग के द्वारा तो पदोन्नति सूची जारी की गई और ही इस संबंध में कोई तैयारी की जा रही है। इससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि पदोन्नति के मामले में शिक्षा विभाग के यूडीटी केवल छले गए हंै, बल्कि वे वरिष्ठता के आधार पर अब काफी पिछड़ भी जाएंगे।

लाभ से वंचित हो जाएंगे रिटायर के करीब वाले यूडीटी

शिक्षाविभाग में बढ़ी संख्या ऐसे यूडीटी की है जो रिटायरमेंट के करीब हैं। रिटायरमेंट से पहले पदोन्नति को लेकर उन्हें कोई आसार नजर नहीं रहा है। ऐसे में प्रमोशन से पहले वे रिटायर हाे जाते हैं तो पद रूतबा के अलावा आर्थिक लाभ से भी वंचित हो जाएंगे। प्रमोशन होने पर वे रिटायर्ड यूडीटी कहे जाएंगे। साथ ही पेंशन भी यूडीटी के वेतनमान के हिसाब से निर्धारित होगा।

हीनभावना भी बढ़ने लगी

आदिमजाति अनुसूचित जाति विकास विभाग स्कूल शिक्षा विभाग सेटअप के हिसाब से भले ही अलग-अलग कार्य करती है। लेकिन यहां पदस्थ शिक्षकों का कार्य समान है। वे बच्चों को शासन के द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रमों के आधार पर पढ़ाई कराते हैं। लेकिन प्रमोशन के मामले में उनके बीच अलग-अलग मापदंड निर्धारित करने से वे एक-दूसरे से पृथक हो गए