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कोरबा पूर्व प्लांट के लिए आसान नहीं लक्ष्य

6 वर्ष पहले
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50वर्ष पुराने कोरबा पूर्व प्लांट के लिए कंपनी ने 76 फीसदी उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे पाना आसान नही है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार उम्मीद से ज्यादा लक्ष्य निर्धारित करने के कारण अधिकारी-कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है।

राज्य पावर जनरेशन कंपनी के काेरबा पूर्व प्लंाट की स्थापना 1967 में हुई थी। इस प्लंाट को स्थापित हुए लगभग 50 वर्ष हो चुके है। प्रदेश में बिजली जरूरतों को ध्यान में रखकर यहां के अधिकारी कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में भी यहां किसी तरह से काम कर बिजली का करने में लगे हैै। इसके बावजूद कंपनी ने इस प्लांट के लिए चालू वर्ष में उत्पादन लक्ष्य 76 फीसदी तक निर्धारित किया है। पुराने हो चुके कोरबा पूर्व प्लंाट के लिए इस लक्ष्य को पाना अासान नही है। इसे लेकर श्रमिक संगठनों ने अपना विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल अभियंता संघ ने इसका विरोध करते हुए संचालक मंडल को ज्ञापन प्रेषित कर विरोध जताया है। अभिंयता संघ के अलावा दूसरे श्रमिक संगठनों में भी इसे लेकर नाराजगी है। संघ के अनुसार कोरबा पूर्व प्लंाट में कंपनी के दूसरे प्लंाटो की अपेक्षा इकाईयों की संख्या ज्यादा है। जिसके कारण प्लांट में टेक्निकल फाल्ट आने पर सुधार मेंं लंबा समय लग जाता है। वर्ष में छ: महिने तो सुधार कार्य में ही चला जाता है। वहीं प्रदूषण के कठिन मापदंडो के कारण यहां की इकाईयों को कम लोड पर चलाया जाता है। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। यहां आटोमाइजेशन नहीं हाेने के कारण उपकरणों के संचालन में कर्मचारियों को तुलानात्मक रूप से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जिसके बावजूद कंपनी को अार्थिक क्षति होना कंपनी कर्मचारी दोनों के हित में नही है। इसे देखते हुए कंपनी को आदेश में संशोधन किया जाना चाहिए।

उत्पादनमें समकक्ष प्लंाटों से आगे : पिछलेतीन वर्ष से कोरबा पूर्व प्लंाट 60 फीसदी उत्पादन के साथ देश में अपने समकक्ष प्लांटों में उत्पादन में सबसे आगे है। कोरबा पूर्व प्लंाट का उत्पादन लक्ष्य 65 फीसदी तक रखा जाता है। यहां के अधिकारी कर्मचारी काफी प्रयास मेहनत से यहां तक पहुंच पाते है। लेकिन इससे ज्यादा लक्ष्य निर्धारित करने से इनका मनोबल टूट रहा है।

कोयला की क्वालिटी में सुधार नहीं

छत्तीसगढ़विद्युत मंडल अभियंता संघ के अनुसार कोरबा पूर्व प्लंाट के लिए एसईसीएल की मानिकपुर कोल माइंस से कोयला आता है। यहां आवश्यक गुणवत्ता के अनुसार कोयला काफी कम मिल पा रहा है। जिससे प्लंाट की इकाईयों के संचालन में बार-बार परेशानी रही है। यहां सप्लाई होने वाले कोयले की क्वालिटी में सुधार देखने नही मिल रहा है। संघ के अनुसार प्लंाट पुरानी तकनीक का है यहां कुलिंग टावर भी नही है। इसके बाजवूद आधुनिक प्लांटो की तरह इसका उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करना ठीक नही है।

इंसेटिवनीति का विरोध

विद्युतमंडल अभियंता संघ ने अप्रेल 2014 से लागू नई इंसेटिव नीति को लेकर विरोध जताया है। इसमें आवश्यक संशोधन की मांग को लेकर संचालक मंडल को ज्ञापन भी सौंपा गया है। इस विषय पर संघ ने 10 फरवरी की शाम 5.30 बजे कोरबा पूर्व प्लंाट के कैंटिन रखी है। प्रबंधन की ओर से गंभीरता से लेने पर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।