साडा से निगम में मर्ज और रिटायर हुए 365 कर्मचारियों को पूरी पेंशन
पिटिशनरों ने कहा- पेंशन का निर्धारण पूरी सेवाकाल की गणना कर की जाए
साडा के समय से अपनी सेवा देकर रिटायर हो चुके या रिटायर होने वाले अधिकारी कर्मचारियों को अब पूरा पेंशन मिलेगा। हाईकोर्ट में जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने रिट पिटिशन पर सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि साडा के समय से नियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों को भी पूरे सेवाकाल की गणना कर पेंशन का लाभ दिया जाए। इस फैसले से जिले के 365 अिधकारी कर्मचारियों के साथ राज्य के हजारों परिवार को लाभ मिलेगा।
नगर पालिक निगम से उपायुक्त के पद से रिटायर होने वाले आरपी तिवारी व कर्मी एनपी देवांगन के रिट पिटीशन पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शासन व याचिकाकर्ताओ के वकीलों के तर्क, तथ्य व साक्ष्यों को सुनने के बाद जस्टिस प्रशंात मिश्रा ने फैसला सुनाया। पिटिशनरों के मुताबिक फैसले में कर्मचारियों के पक्ष को सही माना। कहा कि पेंशन का निर्धारण साडा कार्यकाल की गणना कर की जाय।
पिटिशनरों ने अपनी दलील में कहा था कि साडा का विघटन कर इसे पूरी तरह से निगम मंे समाहित कर दिया गया था। उनकी सेवा भी यथावत रही है, ऐसे में पूर्व की सेवाकाल को पृथक नहीं किया जा सकता। पेंशन का निर्धारण पूरी सेवाकाल की गणना कर की जानी चाहिए। इस फैसले की जानकारी मिलते ही अधिकारी-कर्मचारियों में खुशी की लहर है। छत्तीसगढ़ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ ने भी इस फैसले पर खुशी जताई है।
साडा सेवकों के लिए यह बड़ा फैसला
जिन लोगों ने साडा में अपनी सेवाएं दी है उनकी सेवाओं को पेंशन के निर्धारण में शामिल नहीं किया गया था। इस वजह से वे अधिकारों से वंचित हो गए थे, साथ ही आर्थिक संकट के कारण अनेक परिवार परेशानी में आ गए थे। कोर्ट के इस आदेश ने बड़ी राहत दी है।\\\'\\\' -आरएस चौहान, महामंत्री, नपानि कर्मचारी संघ
पेंशन बड़ा सहारा होता है
आठ साल के लंबे संघर्ष के बाद यह सुखद परिणाम आया है। कोर्ट ने माना के साडा के सेवाकाल को अलग नहीं किया जा सकता। ऐसे में पेंशन के निर्धारण में इस सेवा को शामिल माना जाय। किसी रिटायर्ड के लिए पेंशन की राशि जरूरतंे पूरी करने का एक बड़ा जरिया है। इसी वजह से सरकार भी इसके लिए गंभीर है। इसका लाभ राज्य के सभी प्राधिकरण के सेवकों को मिलेगा।\\\'\\\' -आरपी तिवारी, रिटायर्ड उपायुक्त, नपानि व पिटीशनर
रह गए थे खाली हाथ
सभी प्राधिकरण सेवकों को मिलेगा लाभ
साडा से निगम बनने के बाद कुछ अधिकारी-कर्मचारी रिटायर हो गए थे। लेकिन निगम में वे सेवाकाल 10 साल पूरी नहीं कर पाने के कारण पेंशन की पात्रता से वंचित हो गए थे। इनमें एनपी देवांगन, अधीक्षक जीएस बैस समेत लगभग 10 से ज्यादा थे। अब उन्हें साडा के 25 से 30 साल की सेवागणना होने पर 15 से 20 हजार रुपए पेंशन मिलने की संभावना जताई गई है।
इस आदेश का लाभ न केवल कोरबा के साडा में सेवा देने वालों काे मिलेगा बल्कि राज्य के सभी साडा व अन्य प्राधिकरण के सेवकों को भी मिलेगा। इसमें साडा भिलाई, चिरमिरी, बैलाडीला, कोरबा के साथ बिलासपुर विकास प्राधिकरण, रायपुर विकास प्रधिकरण और टाउन एम्प्रुवमेंट ट्रस्ट का अमला शामिल है। ट्रस्ट को अनेक स्थानों में नगर पंचायत बना दिया गया है।
क्या है मामला
स्पेशल एरियाज आफ डेव्लपमेंट आर्थरिटी (साडा) का गठन शहर के विकास को गति देने के लिए किया गया था। वर्ष 1978 से अधिकारी-कर्मचारियों की स्थायी या अस्थायी तौर पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी। साडा को तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन ने 9 जून 1998 को अधिसूचना जारी कर विघटित कर दिया था। इसके साथ प्राधिकरण की सभी आश्तियां व दायित्व नगर पालिक को सौंप दिया था। अधिकारी-कर्मचारी भी पहले की ही तरह कार्य कर रहे थे। लेकिन जब रिटायरमेंट का दौर शुरू हुआ तब उन्हें पता चला कि सेवा बदलने के साथ शर्तें भी बदल गई हैं। पेंशन का लाभ भी उन कर्मचारियों को दिया जाएगा जिन्होंने नगर निगम में दस वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।