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महिलाओं को स्वावलंबी बनने िदए टिप्स

7 वर्ष पहले
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आयमूलक गतिविधियों के संचालन में बैंकों का सहयोग जरुरी है। इसके स्व सहायता समूहों को अपने बैकिंग शाखा के एवज में ऋण आसानी से मिल जाता है। जिससे वे अपने अपने समूह की महिलाओं के समृद्धि के बारे में सोच बना सकती हैं। साथ ही समूह पंच सूत्र बचत, बैठक, ऋण की वापसी, आपसी लेन-देन लेखा जोखा का नियमित पालन करता है तो उन्हें असुविधा नहीं होगी।

यह बात नाबार्ड रायपुर के महाप्रबंधक डॉ.पीजे रंजीत ने करतला विकास खंड के ग्राम तराईमार में स्व सहायता समूहों के उत्थान उत्थान के लिए जीबीवीएसएस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने महिलाओं को ऋण लेने के पूर्व गतिविधियों का चयन बाजार की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की सलाह भी दिए। इस अवसर पर डॉ.रंजीत ने ग्राम कोई की हरियाली गैंग से जुड़ी महिलाओं द्वारा संजीवनी रस किचन गार्डन के माध्यम को अपनाने की प्रशंसा की।

ग्राम उत्थान योजना के लिए ग्राम पंचायतों एवं जिला प्रशासन के कनवरजेंस के माध्यम को बेहतर बताते हुए करतला के 5 गांव कोई, मदवानी, तराईमार, कछार कल्गामार के लिए नाबार्ड ने ग्राम उत्थान योजना की स्वीकृति देने की जानकारी दी।

उन्होंने योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में ग्राम सभा के माध्यम से कार्य योजना बनाने मंे सहयोग करना क्रियान्वयन मंे ग्राम शासन के मध्य सेतु की तरह जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कार्य करना। करतला विकास खंड के 8 गांव बेहरचुवां, नवापारा, मदवानी, कछार, दैहानभाटा, केराकछार, घिनारा, पीडिया में श्रीविधि से धान की खेती के लिए स्वीकृति मिलने की बात कही। इस अवसर पर ग्राम कोई की हरियाली गैंग की महिलाओं द्वारा बनाई गई संजीवनी रस का विमोचन किया, साथ ही ग्राम कछार में श्रीविधि से धान की खेती का अवलोकन किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री जन धन योजना की विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए लाभ लेने की अपील करते हुए सभी को व्यक्तिगत खाता खोलने की सलाह दी। डॉ.रंजीत भ्रमण के दौरान क्षेत्र में संचालित नाबार्ड बाड़ी विकास कार्यक्रम का अवलोकन किया। कार्यक्रम में डीडीएम विजय चांदेकर, सरपंच, पांचो ग्रामों के ग्राम विकास समिति के सदस्य, बाड़ी हितग्राही, स्वसहायता समूहों के सदस्य, किसान क्लब के सदस्य संख्या उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डालेश्वर कश्यप, शांति देवांगन, गोविंद, शिव, गजेन्द्र साहू ने सहयोग किया।

कार्यक्रम में नाबार्ड