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सुबह होगी देवी आराधना, शाम को किया जाएगा रावण दहन

7 वर्ष पहले
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देवीआराधना का पर्व नवरात्र में नवमी तिथी को सुबह देवी की आराधना होगी, तो शाम को विजया दशमी पर्व में रावण दहन होगा। नवरात्र का अंतिम दर्शन के साथ ही विजया दशमी का उत्साह रहेगा। रावण दहन के साथ देवी दर्शन भी लोग कर सकेंगे। वहीं अष्टमी नवमी का संयोग भी 2 अक्टूबर को एक साथ बन रहा है। समान्यत: कहीं 2 अक्टूबर को ही अष्टमी नवमी पूजा होगी तो कई जगह नवमी दशमी पूजा एक साथ होगी।

शारदीय नवरात्र पर्व में इस बार नवमी दशमी तिथि एक ही दिन हैं। शास्त्रानुसार दशमी तिथी अपरान्ह व्यापिनी होने से नवमी में ही दशमी को विजयादशमी मनाई जाएगी। ज्योतिषविदों के मुताबिक 25 सितंबर को घटस्थापना के साथ नवरात्र शुरू होंगे। जो 3 अक्टूबर तक चलेंगे। पं.विवेकशील पाण्डेय के अनुसार 2 अक्टूबर को दोपहर 12:08 बजे तक अष्टमी है। इसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी, जो 3 अक्टूबर को सुबह 9:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी।

पालकीमें आएंगी, हाथी पर जाएंगी मां दुर्गा : नवरात्रमें इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी में होगा, जबकि पर्व के समापन पर वे हाथी पर सवार होकर विदा होंगी। पंडितों के अनुसार देवी भागवत पुराण में उल्लेख है कि यदि नवरात्र के पहले दिन गुरुवार हो तो माता का आगमन पालकी में होता है समापन शुक्रवार काे हो तो माता हाथी पर सवार होकर वापस जाती हैं। नवरात्र का शुभारंभ 25 सितंबर को और समापन दो अक्टूबर गुरुवार को होगा। पं. दशरथ नंदन द्विवेदी के अनुसार इस बार नवमी तिथि का क्षय होने से पर्व आठ दिन का होगा। दो अक्टूबर को ही अष्टमी नवमी मनाई जाएगी। इस दिन देवी महागौरी सिद्धिदात्री की पूजा एक साथ होगी। प्रतिमाओं का विसर्जन विजया दशमी पर्व शुक्रवार 3 अक्टूबर को होेगा। इस तरह मां हाथी पर सवार होकर विदा होंगी। पं. द्विवेदी ने बताया कि पहले दिन गुरुवार को हस्त नक्षत्र शाम 7.40 बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र के साथ ही घट स्थापना कर लेनी चाहिए। इस दिन घट स्थापना सुबह 6.14 से 7.30 बजे, सुबह 10.30 से दोपहर 3.00 बजे तक और शाम को 4.30 से 6.00 बजे तक करना शुभ रहेगा।

क्या कहते हैं शास्त्र

शास्त्रके अनुसार विजयादशमी पर्व आपराह्नव्यापनी तिथी दशमी तिथी श्रवण नक्षत्र होने के कारण नवमी तिथि में शाम को मनाए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा नक्षत्र की प्रधानता होती है। अगर श्रवण नक्षत्र भी विद्यमान हो तो और अधिक श्रेष्ठता