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गूंजी गुरुवाणी, बंटी खुशियां

7 वर्ष पहले
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शहरमें गुरुनानक देव की जयंती की धूम शहर में रही। दो दिन पहले से भव्य शोभायात्रा निकाल कर प्रकाश पर्व की खुशियां सिक्ख समाज में बिखर रही थी। आकर्षक ढंग से सजाए गए गुरुद्वारे में गुरुनानक देव की जयंती गुरुवार को मनाने सिक्ख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते रहे।

गुरुद्वारे में सुबह से ही रागी जत्था द्वारा गुरुवाणी की अनुगूंज होती रही, जिसमें बड़ी संख्या में साधकों ने संगत की। सिक्ख समुदाय की इस खुशी के पर्व पर अन्य समाज के लोगों ने भी पहुंचकर मत्था टेकते हुए उनकी खुशी में शरीक हुए। शबद-कीर्तन गुरुवाणी में शामिल होने वाला प्रत्येक साधक गुरुद्वारे के मुख्य गेट पर पहुंचते ही मत्था टेकते हुए गुरुनानक देव के प्रति अपनी आस्था जताने से नहीं चूक रहा था। सिक्ख समाज द्वारा जयंती की खुशियां बांटने के लिए अटूट लंगर का भी आयोजन किया। जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल होकर लंगर में प्रसाद ग्रहण किया। हिंदू धर्म में दीपावली, इस्लाम में ईद बकरीद की खुशी का जो उत्साह समुदाय विशेष में रहता है, ठीक वही उत्साह सिक्ख सिंधी समुदाय में प्रकाश पर्व पर रहता है। अपने अपने अंदाज में मनाए जाने वाले इन पर्वों की महत्ता सभी धर्म के लिए महत्व रखती है। गुरुवार की सुबह से देर शाम तक गुरुद्वारा में रौनक बनी रही। पूरे दिन समाज के लोगों ने अराध्य देव श्री गुरुनानक की पूजा में लीन रहे। उनकी खुशी में अन्य समाज के साधकों ने भी शामिल होकर खुशियां बांटते रहे। गुरुनानक देव के प्रति शाम की आराधना दीवान के साथ शुरु होकर मध्य रात को जन्मोत्सव तक चली। इस समय श्री गुरुनानक देव के जन्म का आगाज होते ही भव्य आतिशबाजी की गई।

शबदकीर्तन में पहुंचे रागी : प्रकाशपर्व के मद्देनजर 4 से 10 नवंबर तक गुरुद्वारे में कार्यक्रम आयोजित है। जिसमें शबद कीर्तन के लिए कथा वाचक गुरुदासपुर से हरभिंदर सिंह, रागी जत्था में लखनऊ से निरवैर सिंह, जालंधर से मेहताब सिंह लुधियाना से बीबी जसकरन कौर यहां पहुंची हैं। आयोजन के दौरान सिक्ख समुदाय के लोगों को गुरुवाणी शबद कीर्तन के माध्यम से गुरुनानक देव की प्रासंगिकता बताई जा रही है। गुरुवार को टीपीनगर गुरुद्वारा में इनके द्वारा शबद कीर्तन किया गया।