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श्रमिकों के हित में हो श्रम कानून उद्योगपतियों के इशारे पर नहीं

7 वर्ष पहले
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देश में श्रमिकों के हित में श्रम कानून बनना चाहिए, राष्ट्रीय वेतन नीित लागू होना चािहए। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेशीकरण बंद होना चाहिए। यह कहना है बीएमएस के छत्तीसगढ़ के प्रांतीय अध्यक्ष सत्येंद्रनाथ दुबे का।

शनिवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान सत्येंद्रनाथ दुबे ने कहा कि देश में औद्योगपतियों के इशारे पर श्रम कानून बन रहा है। इसे बंद करते हुए श्रमिकों के हित में कानून बनाना चाहिए। औद्योगों के स्थायी प्रवृत्ति के काम में ठेका के बजाए स्थायी श्रमिक रखना चाहिए। श्रमिकों के मिनिमम वेजेस में बढ़ोतरी करनी चाहिए। इसी तरह पेंशन में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए। सरकार के पेंशन में आंशिक बढ़ोतरी किए जाने पर उन्होंने सरहना करते हुए इस पर और जोर देने की जरूरत बताई। देश में केंद्र राज्य के औद्योगिक उपक्रमों में वेतन की एक समानता के लिए राष्ट्रीय वेतन नीति लागू करने की जरूरत बताई। इसके अलावा उन्होंने बताया कि बीएमएस के साथ इंटक, एचएमएस, सीटू, एटक संयुक्त रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेशीकरण का विरोध कर रहे हैं। साथ ही कालेधन समेत 10 मुद्दे पर उनकी सयुंक्त संगठन राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन कर रही है। इस दौरान बीएमएस के क्षेत्रिय संगठन मंत्री अखिल भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. सुधाकर कुलकर्णी, छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी महासंघ के महामंत्री राधेश्याम जायसवाल, बीएमएस के जिला मंत्री सलीम खान भी उपस्थित थे।