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जो हुए ठगी का शिकार उनकी संपत्ति की नीलामी

6 वर्ष पहले
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बिलासपुरके उस्लापुर में सर्वसुविधायुक्त मकान का सपना देखकर सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी-कर्मचारी ठगी का शिकार हुए। इसमें बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत रही। अब बैंक प्रबंधन प्रशासन के माध्यम से ठगी के शिकार लोगों की ही संपत्ति नीलाम करने की तैयारी में है।

बिलासपुर लिंक रोड की सत्या कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालन संतानु चौधरी ने वर्ष 2005 में कोरबा में बिजली कंपनी एसईसीएल में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क किया था। उसने लोगों से बिलासपुर के उस्लापुर में सर्वसुविधायुक्त मकान बनाकर देने का सपना दिखाया था। इसके लिए एसबीआई से अासान होम लोन उपलब्ध कराने का वादा किया था। बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारियों ने मकान के लिए आवेदन किया था। आवेदन पत्र के बीच में ही लोन के लिए बैंक प्रपोजल था। जिसमें आवेदकों से हस्ताक्षर लिया गया था। बाद में बताए गए लोकेशन पर सत्या कंस्ट्रक्शन ने कार्य भी शुरू किया।

इस बीच आवेदन करने वालों के नाम से बैंक से एकमुश्त लोन बिल्डर्स को जारी कर दिया गया। जबकि नियम शर्तो के अनुसार ऐसा नहीं होना था और इससे पहले आवेदकों की मंजूरी लेनी जरूरी थी। इसकी जानकारी जब आवेदकों के बैंक खाते से पेमेंट की रकम कटने लगी तब हुआ। दूसरी ओर एक साल बाद बिल्डर्स ने निर्माण कार्य बंद कर दिया।

इस तरह बिल्डर्स ने अपने सहयोगी और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर लोगों से ठगी की। बावजूद ठगी के पीड़ित अधिकारी-कर्मचारी कई सालों तक इस मामले में कार्रवाई और न्याय के लिए भटकते रहे। जगह-जगह फरियाद की। कई लोगों ने उपभोक्ता फोरम में मामला लगाया था। लगभग 1 साल पहले बिलासपुर उपभोक्ता फोरम ने राहत देते हुए उन्हें कर्ज की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए बैंक को उनके खाते से काटी गई रकम वापस करने और क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया था। दूसरी ओर अधिकांश लोगों ने पुलिस से इस मामले की शिकायत की हुई थी। प्रमुख रूप से बिजली विभाग के अधिकारी प्रेमजी पटेल नियमित रूप से प्रशासन, पुलिस, बैंक प्रबंधन समेत सरकारी जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर इस मामले में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। आखिरकर बिलासपुर रेंज के आईजी पवन देव ने एसआईटी से इस मामले की जांच कराई। साक्ष्यों के संकलन के बाद बिल्डर्स संतानु चौधरी, भागीदार सुजॉय समेत तत्कालिन बैंक मैनेजर पीसी जाटव के द्वारा लोगों से ठगी करना पाया गया। जिसके आधार पर पिछले महिने सिटी कोतवाली में तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। लेकिन दूसरी ओर एसबीआई प्रबंधन द्वारा पीड़ितों को राहत देने के बजाए सकरी तहसीलदार न्यायालय से पीड़ितों की ही संपत्ति नीलाम कराई जा रही है। इससे पीड़ित परेशान हंै। पीड़ितों इसकी शिकायत उच्चअधिकारियों से की है। इसके लिए पूर्व इंटक अध्यक्ष एवं वर्तमान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ जोन ब्रम्हासिंह समेत पीड़ित अधिकारियों-कर्मचारियों ने न्यायालय का फैसला आने तक नीलामी रोकने की मांग की है।

उनकी गलती का खामियाजा हम भुगत रहे

इसमामले में पीड़ित प्रेमजी पटेल के मुताबिक बिल्डर्स ने अपने भागीदारों समेत तत्कालिन बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर होम लोन की रकम एकमुश्त हासिल कर ली। जबकि आवेदकों से इसकी मंजूरी नहीं ली गई। अावेदनों में भी कांटछांट और आेवर राईटिंग थे। बावजूद बैंक प्रबंधन ने लोन की रकम पास कर दी। यह गलती बैंक प्रबंधन की ओर से हुई है। लेकिन अब बैंक प्रबंधन उल्टे ही पीड़ितों पर नीलामी की कार्रवाई कराने में लगा है। उनकी गलती और खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। इससे पीड़ित आर्थिक मानसिक रूप से परेशान है।