जीवन में समर्पित भाव से करें भक्ति
जैनमिलन समिति के तत्वावधान में बुधवारी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में श्री 1008 वेदी प्रतिष्ठा कलशारोहण महोत्सव के अंतिम दिन आचार्य कुमुदनंदी महाराज ने कहा कि जीवन अमूल्य है। मानव तन मिला है तो सत्य और अहिंसा के मार्ग में चलकर महावीर स्वामी के आदर्श बनें।
उन्होंने आगे कहा कि समय इतना मूल्यवान है कि वह लौटकर नहीं आता, जो बीत गया जो बीत गया। समय का सही उपयोग करने वाले ही प्रभु के प्रिय होते हैं, इसलिए जितना दिन जीना है, प्रभु के लिए जीएं। उन्होंने कहाकि सभी को सात दिन में ही मरना है, इसलिए मौत से डरने के बजाय, समर्पित भाव से भक्ति नित्य कर्म करते हुए जीएं। सात दिन का मतलब उन्होंने अंको से जोड़ते हुए कहा कि सप्ताह में सात दिन के बाद वहीं दिन पुन: आते हैं, रविवार के बाद सोमवार, फिर मंगलवार। कब किसकी मौत जाएगी, परमात्मा के सिवाय कोई नहीं जानता। इसलिए उस परमात्मा की भक्ति में मन लगाते हुए जीएं। इस अवसर पर आचार्य अनूपकीर्ति जी महाराज उपस्थित थे। शुक्रवार की सुबह से ही मंदिर में श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा पूजन कार्यक्रम हुआ। दोपहर में महावीर जिनालय में श्री जी की स्थापना नवनिर्मित वेदी में की गई। वेदी प्रतिष्ठा कलशारोहण महोत्सव में मुख्य अतिथि महापौर रेणु अग्रवाल, सभापति धुरपाल सिंह कंवर, उषा अग्रवाल, सुनील जैन, योगेश जैन का सम्मान समिति की ओर से किया गया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष सुधीर जैन, सचिव अभय जैन, कोषाध्यक्ष महेन्द्र जैन, मुनि सेवा समिति के कपूरचंद पुजारी, अरविंद जैन, सुनील जैन, ताराचंद लोहाड़िया, जेके जैन, धीसुलाल पाटनी, विद्यावती जैन सहित संयोजक डॉ.विमल जैन, नेमीचंद जैन, प्रदीप जैन, सत्येन्द्र जैन, सुबोध जैन, मुकेश सिंघई, अशोक नायक, शीलचंद्र, अशोक जैन सहित समाज के लोगों ने सहयोग किया।
सहयोग से बढ़ी मंदिर की भव्यता
शुक्रवारको नए जैन मंदिर के शीर्ष पर कलशारोहण हुआ। मंदिर के पुजारी संरक्षक मंडल के सदस्यों ने श्री 1008 वेदी प्रतिष्ठा के साथ कलश स्थापना विधानपूर्वक किया। स्वर्ण परत युक्त कलश मंदिर की भव्यता आकर्षण का प्रतीक है। लगभग 10 लाख रुपए कीमती कलश मंदिर के लिए बिलासपुर निवासी शकुन संघई, प्रवीण संघई, प्रशांत संघई बालको की ममता जैन, जेके जैन के सहयोग से प्राप्त हुआ है।
प्रवचन देते कुमुदनंदी महाराज।