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खगोल विज्ञान की नजर से खंगालेंगे सिरपुर का अतीत

6 वर्ष पहले
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िवशिष्टजनों के साथ बौद्ध विहार और संग्रहालय का किया भ्रमण, िवशेषज्ञों से िवभिन्न स्थानों का महत्व जाना।

भास्करन्यूज|महासमुंद

खगोलवैज्ञानिक और पद्म भूषण तथा पद्म विभूषण से सम्मानित डाॅ. जयंत विष्णु नार्लीकर ने सिरपुर को देश की अमूल्य धरोहर कहा है। उन्होंने सिरपुर और उसकी पुरासंपदा को संजोने की दिशा में चर्चा करते हुए बताया कि सिरपुर की पुरातात्विक महत्व को वे खगोल विज्ञान से जोड़ने और समझने का प्रयास कर रहे हैं।

वे सिरपुर के पुरा वैभव से बड़े प्रभावित हुए तथा राज्य शासन द्वारा पुरा वैभव सामने लाने के प्रयासों की उन्होंने प्रशंसा की। लक्ष्मण मंदिर के अवलोकन के दौरान दक्षिण कोशल की मंदिर निर्माण कला और सिरपुर में बौद्ध विहारों की विस्तृत जानकारी पुरातत्वविद् अरुण कुमार शर्मा ने दी। डाॅ. नार्लीकर आज दोपहर सिरपुर के विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर सहित विभिन्न बौद्ध विहार, संग्रहालय, पंचतायन शिव मंदिर और नदी तट पर विशाल बाजार सहित अन्य पुरातात्विक स्थलों का अवलोकन किया।

भ्रमण के दौरान डाॅ. नार्लीकर की धर्मप|ी मंगला राजावाडे और साहित्यकार राजेन्द्र मिश्र सहित पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी उनके साथ थे। डाॅ नार्लीकर सिरपुर के विशाल बाजार के पुरा अवशेषों तथा बौद्ध विहार और लक्ष्मण मंदिर के निकट स्थित संग्रहालय भी गए और पुरातात्विक महत्व की मूर्तियां एवं अन्य वस्तुओं का भी अवलोकन किया और इस संबंध में पुरा वैभव की जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि सांवती सदी में सिरपुर भारत का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। यहां बौद्ध, जैन, शैव और वैष्णव संस्कृति फली-फुली। चीन के महान पर्यटक और विद्वान ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में सिरपुर का विस्तार से उल्लेख किया है।

सिरपुर में शनिवार को प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक जयंत विष्णु नार्लीकर को छठवीं शताब्दी के अवशेषों की जानकारी देते िवशेषज्ञ डॉ. अरुण शर्मा।

सिरपुर में भ्रमण के दौरान खगोल वैज्ञानिक डॉ नार्लीकर ने स्कूली बच्चों से भी बातचीत की।

कला और संस्कृति से जुड़ें

सिरपुरमें बौद्ध विहार के भ्रमण के दौरान डाॅ. नार्लीकर ने अध्ययन भ्रमण पर आए सरस्वती शिशु मंदिर तिलक नगर बिलासपुर के स्कूली बच्चों से मुलाकात की। स्कूली बच्चे खगोल वैज्ञानिक को अपने बीच पाकर बड़े प्रसन्न हुए। डाॅ. नार्लीकर ने बच्चों का अभिवादन स्वीकार किया और उन्हें अपनी कला, संस्कृति से जुड़ने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।