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30 साल बाद भी नहर से खेतों को पानी नहीं

7 वर्ष पहले
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जिलामुख्यालय से लगे ग्राम मचेवा के किसानों को 30 वर्ष बितने के बाद भी कोडार नहर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हर खेतों में पानी पहुंचा कर फसल लेने के लिए बनाए गए कोडार नहर योजना का बुरा हाल है।

कोडार नहर योजना लगभग 1983-84 में तैयार किया गया था। इस योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है और ही कभी इस नहर की मरम्मत की गई है। विभाग के देखरेख की कमी के कारण यह नहर का पानी किसानों के खेतों को नहीं मिल पा रही है। ग्राम के किसान हीरामन साहू, पीलू राम साहू, बाबूलाल सिन्हा, बेनी देवांगन, भरत साहू ने बताया कि कोडार नहर का िनर्माण इसलिए बनाया गया कि किसानांे का प्रर्याप्त मात्रा में मिल जाए लेकिन आलम यह है कि किसानों को नहर का पानी मिलता ही नहीं। विभाग के अधिकारी भी क्षेत्र में आकर नहर की देख रेख करने के प्रति संजीदा नहीं हैं। किसान कई बार अपनी समस्याएं अधिकारी एवं राजनेता को बता चुके है, पर अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगती है। नहर का पानी नहीं मिलने के कारण से लगभग 100 एकड़ की जमीन को बोर या दूसरे अन्य साधनों के भरोसे बकाना पड़ रहा है। साधन संपन्न किसान के पास से बोर की पानी के लिए प्रति एकड़ किसानों को 3 से 4 हजार रुपए तक की आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों का आरोप है कि हमारे खेत से नहर नाली गुजरी हुई है लेकिन खेत ऊपर होने के कारण नहर का पानी खेत तक नहीं पहुंच पाता है। वही खरोरा अस्पताल के पास बने लिप्ट एरीकेशन के माध्यम से खेतों को सिंचाई करने के लिए बनाया गया है लेकिन उनका पानी मचेवा के महर्षि स्कूल के आसपास आते तक खत्म हो जाता है। जिससे फसलों का नुकसान होने की स्थिति निर्मित हो जाती है। लिप्ट एरिकेशन का नहर नाली टूट फूट के कारण से भी पानी यहां तक नहीं पहुंच पाता है। किसानों का मानना है कि नहर नाली का निर्माण क्राकीट से किया जाए जिससे कृषि कार्य के लिए प्रर्याप्त मात्रा में जल मिल सके।

नहर में पर्याप्त पानी छोड़ा गया लेकिन खेतों की प्यास नहीं बुझ रही।