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सिर्फ एक बार बांध से छोड़ा था पानी, 500 एकड़ खेत में दरार
रबीकी फसल के लिए एक बार पानी दिया गया। धान के बीज में जैसे ही अंकुरण आया बांध से जलापूर्ति रोक दी गई। केशवा बांध के कमांड एरिया के पांच गांवों में मरते हुए पौधों को देख किसान आक्रोशित हैं। झाल खम्हरिया, बोरियाझर, नवाडीह, सिरगिड़ी और कोसरंगी के पांच सौ एकड़ से भी अधिक के रकबे में धान की फसल ली जा रही है। यहां की जमीन में अब दरारें पड़ गई हैं।
जल उपभोक्ता समिति और किसानों के साथ हुई जिला प्रशासन की बैठक में तय कर रोटेशन के आधार पर इन गांवों को रबी फसल की अनुमति दी गई। बुआई के लिए बांध से पानी भी छोड़ा गया। किसानों ने जमापूंजी खर्च करते हुए रबी की फसल लेने पूरी ताकत खेत पर झोंक दी। अब उनके खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा है। बांध में नहर के द्वार बंद कर दिए गए हैं। हाईवे अथारिटी ने सड़क में नहर पुल बनाने के लिए नौ दिन का समय मांगा था। पुल बनाने में देरी होने के कारण नहर में पानी जाना संभव नहीं है। हम पानी देने को तैयार हैं, लेकिन नहर जर्जर है और सड़क पर पुल तोड़ दिए जाने के कारण ब्रेक हो गया है। गांव के किसान कौशल गिरी ने बताया कि झालखम्हरिया और हाड़ाबंद के पास सड़क चौड़ीकरण के नाम पर काफी दिनों से यह खेल खेला जा रहा है।
महासमुंद केकेशवा जलाशय से रबी फसल के लिए पानी नहीं मिलने के कारण अंकुरण के तत्काल बाद खेतों में पड़ गईं दरारें, मर रहे पौधे। किसानों का कहना है कि समय रहते पानी नहीं छोड़ा गया तो उन्हें दोबारा बोनी की स्थिति से गुजरना पड़ेगा और यह नुकसानदेह है।
जिस सुस्ती से पुल बन रहा, नहीं लगता पंद्रह दिन में पहुंचेगा पानी
झालखम्हरियाके किसान सीताराम साहू ने बताया कि पांच एकड़ में रोपा लगाया है, पानी नहीं मिलने से उसे नुकसान पहुंचेगा। यहां के कौशल गिरी ने चार एकड़ में, रेवा ध्रुव ने पांच एकड़ में और सोमनाथ साहू ने 20 एकड़ में धान की बोनी की है। खेतों में ददार पड़ने के कारण किसानाें की चिंता बढ़ती जा रही है, कई खेतों में आधा धान ही अंकुरित हो पाया है। किसानों का कहना है कि इस स्थित में एक बाद फिर पानी जरूरत खेतों में पड़ती है, पानी नहीं मिलने के कारण किसानों को पुन: धान की बीज अंकुरित कर खेतों में डालना पड़ेगा। यदि समय पर पानी मिल गया होता तो दोबारा बोनी की जरूरत नहीं पड़ती। चार फरवरी को पुल तोड़ते समय कहा गया था कि चार दिनों के भीतर इसे बना दिया जाएगा, लेकिन नौ दिन हो गए पानी निकासी के लायक पुल नहीं बन पाया है।
अंकुरण के बाद पानी नहीं मिलने से अब सड़ने लगे हैं धान के पौधे
झालखम्हरिया और हाड़ाबंद के बीच हाईवे में बनाए जा रहे इस पुल के कारण नहर में नहीं छोड़ा जा रहा पानी, पांच गांव के किसान रबी फसल को लेकर चिंतित।
इरीगेशन के एसडीओ एएलसाहू काकहना है कि किसानों ने भी पानी रोकने के लिए कहा था इसलिए पुल निर्माण की अवधि तय की गई। निर्माण होते ही पानी छोड़ा जाएगा। किसानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
इनका यह कहना है
जलउपभोक्ता समिति अध्यक्ष हरिकृष्णभार्गव काकहना है कि लगातार अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं इसलिए खेतों तक पानी पहुंचने में देरी हो रही है। समिति ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। जल्द ही बेहतर समाधान निकाला जाएगा।