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कुंभ में नेत्रहीन बच्चों ने अपने कार्यक्रम से लुभाया दर्शकों को

6 वर्ष पहले
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राजिमकुंभ के आठवें दिन संत समागम शुभारंभ होने के बाद मुख्य मंच से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में महासमुंद जिले के बागबाहरा के निरंजन साहू के नेतृत्व में नेत्रहीन बच्चों ने संगीत संध्या में चार चांद लगा दिए।

उन्होंने संगीतमय कार्यक्रम में आजा मां तैनु अंखिया, मै तो गई मइया द्वार, आजा मां आजा मां, सांई बाबा का सिक्का चलेगा, दया कर दान अम्बे जैसे गीतों को गाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। मंगलवार की शाम से रातभर सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने वालों की भीड़ लगी रही। लोक मंच अर्जुन्दा बालौद की छत्तीसगढ़ लोकरंग लेकर आये दीपक चन्द्राकर एवं कुलेश्वर ताम्रकर ने अपने साथियों के साथ मिलकर करमा, ददरिया, सुवा सरगुजिहा, गौरा-गौरी, राउतनाचा एवं जसगीत, होली गीत नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को बांधे रखानृत्य एवं गायन के माध्यम से प्रस्तुत कर लोगों को बांधे रखा। ढोला मारु गायिका रजनी रजक भिलाई ने जनश्रुति की लोककथा ढोला मारु की प्रेमकथा को गायन के माध्यम से प्रस्तुत की। राउत नाचा के क्रम में लखन यादव मोहदा ने रामायण-भागवत के दोहे से राउत नाचा प्रस्तुत किया

राजिम. मुख्य मंच पर प्रस्तुति देते नेत्रहीन बच्चे।