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झूठ बोल रहा वन विभाग, परसाहीदादर के पीडि़तों की दशा अभी भी है दयनीय

7 वर्ष पहले
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महासमुंद| विधायकडा विमल चोपड़ा ने परसाहीदादर के संबंध में सामान्य वन मंडल महासमुंद से जारी बयान को सफेद झूठ निरूपित करते हुए कहा है कि संवेदनहीन प्रशासन ने वास्तविक वनवासियों के हक को देने में आना-कानी करते हुए सैकड़ों फर्जी लोगों को वन भूमि का पट्टा लेन-देन कर बॉटा है इसकी शिकायत जिला प्रशासन को करने के बाद भी जांच नहीं की जा रही है एवं केवल आदिवासियों को बदनाम करने का षडयंत्र रचा जा रहा है।

प्रशासनिक पदो पर बैठे बड़े-बड़े अधिकारी दो से चार एकड़ में फैले बंगले में रहते है, अवैधानिक नौकर-चाकरों कों घर में लगाकर रखते है परंतु आजीविका के लिए वर्षो से सरकारी भूमि पर खेती कर रहे आदिवासियों को बेदखल करने में संकोच नहीं करतें। केशवा में 35-40 एकड़ भूमि में हजारों वृक्षों की कटाई कर किए गए कब्जे एवं केशवा नाले को पाटकर किए गए कब्जे पर कार्रवाई के समय इसी वन मंडल के अधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गुंडो से डरकर भाग जाते थे, परंतु थाने में प्राथमिकी तक दर्ज कराने का साहस नहीं जुटा पाते परंतु गरीब आदिवासियों को 6-7 माह से प्रताड़ित करने में कोई कसर प्रशासन ने नहीं छोड़ी।

परसाहीदादर में घटिया पोल से फेनसिंग की गई जिसमें भारी भ्रष्टाचार झलकता है, उस पर कोई कार्रवाई नहीं। प्रशासनिक आतंकवाद का इससे बड़ा उदाहरण छत्तीसगढ़ में कही नहीं मिलेगा जहां पर आदिवासियों के जीने-खाने की वस्तुओं को जब्त कर बच्चे, महिलाओं और पुरूषो को अलग-अलग जेल में भेज दिया गया।