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महिलाओं ने शोषण के खिलाफ एकजुट होने का लिया संकल्प

7 वर्ष पहले
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आस्थासोशल सस्था द्वारा मानव अधिकार और महिला अधिकार पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन संस्था प्रमुख तारिणी चंद्राकर, शोभा शर्मा, मीना वर्मा, विजय लक्ष्मी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर चंद्राकर ने कहा कि मानव अधिकार की सुरक्षा के बिना सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक, आजादी खोखली है मानवाधिकार की लड़ाई हम सब की लड़ाई है विश्वभर में धर्म जाति के नाम पर मानव द्वारा मानव का शोषण हो रहा है। अत्याचार और जुल्म के पहाड़ तोेेड़े जा रहे हैं। मानव अधिकार का मतलब ऐसे हक जो हमारे जीवन और मान सम्मान से जुड़े है यह हक हमें जन्म से मिलता है और हम सब आजाद है ं। यदि हमें हमारा हक दिलाने में सरकारी महकमा हमारी मदद नहीं कर रहा है तो हम मानव अधिकार आयोग में शिकायत कर सकते है और इसके लिए किसी वकील की जरुरत नहीं पड़ती है। विजय लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि अपने ही घर में असुरक्षित होने और अपने ही लोगों से मिलने वाली प्रताड़ना यानी की घरेलू िहंसा पूरी दुनिया की महिलाओं के जीवन के लिए एक दंश है। कार्यक्रम का संचालन निरंजना चंद्राकर आभार सरिता साहू द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सीता, लीना चंद्राकर, उमा सरकार, तुलसी, ईश्वरी, नूतन, राधा रेवती, ललिता मौजूद थे।

परिचर्चा आयोजित

आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में मानव अधिकार दिवस के अवसर पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें प्राचार्य साधना कसार ने कहा कि हमारा अधिकार वहीं तक होता जहां तक दूसरे के अधिकार का हनन होता है दूसरे के अधिकार का हनन होता हो। सांस्कृतिक प्रभारी तोषण गिरि गोस्वामी ने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक होते है, इसलिए हमें अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को संबोधित करती हुईं संस्था की प्रमुख तारिणी चंद्राकर।