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गांव-गांव में आयुष वाटिका तैयार करने पहल
आयुषवाटिका निर्माण के तहत को आयुषविंग, जिला चिकित्सालय में सीईओ एसएन राठौर के द्वारा अडूसा औषधि पौधों का रोपण किया गया।
डा आरके परदल सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय द्वारा गिलोय एवं डा अरविंद मराबी जिला आयुर्वेद अधिकारी द्वारा ब्राम्ही औषधि पौधों का रोपण किया गया। आयुषविंग के औषधि वाटिका में लगभग 260 औषधि पौधों का रोपण किया गया। जिसमें अडूसा के 15 , गिलोय के 20, ब्राम्ही के 10, शतावर के 20, पत्थरचटा के 10, जटामांसी के 10, आवला के 10, अश्वगंधा के 15, सर्पगंधा के 30, घृतकुमारी के 20, अशोक के 20, अपराजिता के 5, गुंजा के 10, श्यामातुलसी के 10, लाइम ग्रास के 10, गुडहल के 5, निर्गुण्डी के 10, गुग्गुल के 5, मेहंदी के 10, केऊकन्द के 15, बेल के 5 एवं अन्य प्रकार के पौधों का रोपण किया गया।
औषधि वाटिका रोपण कार्यक्रम में मुख्य रूप से डा एसके शुक्ला, डा घनश्याम चंद्राकर, डा के गजभिये, डा नेहा विक्टर, डा यशवंत चंद्राकर, डा निखिल गोस्वामी, डा तृप्ति तिवारी, जेआर जयसवाल, एस तिग्गा उपस्थित थे।
औषधि पौधों की खेती से आमदनी हासिल कर सकते हैं किसान
भारतीयजलवायु के मद्देनजर 32 प्रकार के ऐसे औषधीय पौधे हैं, जिनकी खेती करके किसान ज्यादा आमदनी हासिल कर सकते हैं। औषधीय पौधें की एक ओर उपलब्धता बढ़ेगी तो दूसरी ओर उनके लुप्त होने का खतरा भी नहीं रहेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक आंवला, अश्वगंधा, सैना, कुरु, सफेद मूसली, ईसबगोल, अशोक, अतीस, जटामांसी, बनककड़ी, महामेदा, तुलसी, ब्राहमी, हरड़, बेहड़ा, चंदन, धीकवर, कालामेधा, गिलोय, ज्वाटे, मरूआ, सदाबहार, हरश्रृंगार, घृतकुमारी, पत्थरचट्टा, नागदौन, शंखपुष्पी, शतावर, हल्दी, सर्पगंधा, विल्व, पुदीना, अकरकरा, सुदर्शन, पुर्नवादि, भृंगराज लाभकारी हैं।