सड़क पर तीर्थयात्रियों की पंगत, अफसर बोले- इतना तो सहना पड़ेगा
वैष्णो देवी का दर्शन करने चयनित 415 बुजुर्गों को रवानगी के पहले आत्मग्लानि के दौर से गुजरना पड़ा। महासमुंद के टाउन हाॅल में शुक्रवार को ठहरे तीर्थयात्रियों के जत्थे के कई लोगों से पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग के अफसरों ने मजदूरी तक करा ली। इतना ही नहीं, सड़क के दोनों किनारे पर पंगत लगवाकर खाना दिया गया।
खाना खाते समय बुजुर्गों के बीच से वाहन गुजरते रहे। परोसे गए खाने में धूल और कचरा पड़ता। बुजुर्गों ने शिकायत की, तो अफसरों ने दो टूक कह दिया कि तीर्थाटन करना है, तो सब सहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत जिले से बुजुर्गों का चयन वैष्णो देवी यात्रा के लिए किया गया है।
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इसके लिए 415 तीर्थ यात्रियों का चयन हुआ है। यात्रा में भेजने से पहले महासमुंद, बागबाहरा, सराईपाली, बसना और पिथौरा से शुक्रवार सुबह सभी को टाउन हॉल लाया गया। यहां न तो उन्हें समय पर नाश्ता मिला और न ही खाना दिया गया। खाना दिया गया, तो उसमें भी अव्यवस्था का आलम रहा। कई बुजुर्गों को खाने में दाल कम मिली। इसके कारण वे सूखा भात खाते नजर आए। कुछ बुजुर्गों ने पत्तल लेकर एक घंटे तक इंतजार किया, तब जाकर खाना नसीब हुआ। कई लोगों को अव्यवस्था के बीच सरकारी खाना भी नसीब नहीं हो सका।
बुजुर्गों के बीच से गुजरते रहे वाहन
बिन्द्रावन गांव के बुजुर्ग घनश्याम चक्रधारी भोजन परोसते।
महासमुंद. सड़क में बुजुर्गों की लगा दी पंगत, कई वाहन गुजरते रहे।
कई का नहीं हो सका मुंह मीठा
विभाग की ओर से सभी बुजुर्गों के के लिए खाने के साथ मीठा देने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि मौके पर आधे से अधिक बुजुर्गों को गुलाब जामुन नहीं मिला। तीर्थ यात्री उषा निगम नर्रा ने बताया कि टाउन हॉल में कोई सुनने वाला नहीं था। कर्मचारी अपनी मर्जी से बुजुर्गों को भोजन परोस रहे थे। घटिया दर्जे का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था। बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए एक भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था।
बुजुर्ग खुद बने थे मजदूर
बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम बिन्द्रावन के घनश्याम चक्रधारी ने बताया कि लोगों के पत्तल में एक-एक घंटे तक भोजन नहीं पहुंच रहा था। लोग भूख से बेहाल हो रहे थे। बुजुर्गों काे भोजन देने के लिए चार-पांच कर्मचारी थे। एेसे में भोजन समय पर नहीं मिल रहा था। इस पर अधिकारियों से शिकायत की गई। इस पर उन्होंने कह दिया कि तुम्ही लोगों के लिए तो यह सब व्यवस्था कि गई है। भोजन परोसने का काम करो, तब तुम्हें भी भोजन मिलेगा। इस पर कई बुजुर्गों ने साथियों को भोजन परोसा।
क्या जरूरत थी बुजुर्गों को पत्तल लेकर सड़क के दोनों किनारे पर बैठने की। जगह कम होने के कारण बारी-बारी से भोजन दिया जा रहा था। बुजुर्ग खुद अव्यवस्था के शिकार हुए हैं, तो इस पर हम क्या कर सकते हैं। सुधाकर इंचुलकर, सहायक संचालक समाज कल्याण विभाग