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26 बच्चे, 3 कमरों का हॉस्टल उसमें वन विभाग का दफ्तर भी

5 वर्ष पहले
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आदिवासी बच्चों को हॉस्टल सुविधा देने के नाम पर कोताही बरती जा रही है। वनांचल में हाॅस्टल ऐसे भवन में संचालित है जहां एक परिवार का गुजारा हो सकता है, लेकिन यहां 26 बच्चों को रखा गया है। ऊपर से हॉस्टल अधीक्षक के लिए यहां रूकने की व्यवस्था नहीं है। अधीक्षक भी दूसरे के घरों में बैठकर हॉस्टल की निगरानी करते हैं। जगह के अभाव में 26 दर संख्या वाले इस हॉस्टल में 15 से 20 बच्चों की ही उपस्थिति रहती है।

जिला मुख्यालय से दूरस्थ वनांचल गांव हाथीबाहरा में प्राथमिक वनोपज सहकारी मुख्यालय का भवन है। इस भवन में 2007 से प्री मैट्रिक बालक छात्रावास संचालित है। तीन कमरे वाले इस भवन में एक बेड पर चार-चार बच्चे सोते हैं। मंगलवार 3 बजे भास्कर रिपोर्टर जब यहां पहुंचे तो हॉस्टल में ताला लगा था और चौकीदार दूसरे के घर में था। पूछने पर पता चला कि बच्चे स्कूल गए हुए थे और अधीक्षक सरकारी काम से ब्लॉक मुख्यालय गए हुए थे।

26 बच्चों के लिए एक शौचालय : वन विभाग के इस भवन में 26 बच्चों के लिए एक शौचालय है। भले ही प्रशासन ओडीएफ गांव बनाकर वाहवाही लूट रही हो लेकिन यहां रहने वाले बच्चे इस टायलेट का उपयोग नहीं करते, एक किमी दूर तालाब के पास जाकर नित्यकर्म करने को मजबूर हैं। यहां कुछ महीने पहले ही बोर खनन हुआ है, लेकिन यहां स्नानागार नहीं बना है। यहां रहने वाले बच्चों को खेल सामग्री तो मिली है, लेकिन इसका उपयोग कभी नहीं कर सकते इसलिए कि यहां खेल मैदान नहीं है।

24 हाॅस्टल किराए के भवन भरोसे
जिले में 24 हॉस्टल एेसे हैं जो किराए के भवन में संचालित है। नए भवन बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिल पाने के बाद ही खुद का भवन हो सकता है। हाथीबाहरा में स्थिति का जायजा लिया जाएगा। विवेक दलेला, सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग

आठ साल से चल रहा हॉस्टल

तीन छोटे-छोटे कमरे में 26 बच्चों को हॉस्टल सुविधा देने में दिक्कत तो होती है। वन विभाग की ओर से बनाए गए भवन में बीते आठ साल से संचालित है। विभाग की भवन बनने के बाद ही बच्चों कोे पर्याप्त सुविधा मिल पाएगी। सुनील कुमार ध्रुर्वे, अधीक्षक हाथीबाहरा

इस लघु वनोपज भवन में संचालित हो रहा बालक हॉस्टल।

भवन में वन विभाग की भी सामग्री
ऐसा नहीं कि वन विभाग ने पूरे इस भवन को आदिवासी हाॅस्टल विभाग को दे दिया है। यहां लघु वनोपज संबंधित कागजात सहित आलमारी भी भवन में मौजूद है। इन सब सामानों को उसी कमरे में रखा गया है जहां बच्चे सोते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि वन विभाग के कर्मचारी यहां बैठक और वन विभाग के काम को भी यहां बैठकर निबटाते हैं।

दूसरे घर में रहते हैं अधीक्षक
हॉस्टल में 26 बच्चों के लिए अधीक्षक, चौकीदार तथा रसोइया की नियुक्ति हुई है। भोजन व्यवस्था बरामदे के एक हिस्से में होता है लेकिन बच्चे अपने बिस्तर में बैठकर भोजन के साथ पढ़ाई भी करते हैं। अधीक्षक बच्चों की सुरक्षा और निगरानी हॉस्टल से बाहर एक किराए के भवन में रहकर करते हैं। कर्मचारियों की विवशता है कि वह यहां चाहकर भी नहीं रह सकते बच्चों के रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जंगल में होने के कारण अधिकारियों काे देेखने की फुर्सत नहीं है।

अधीक्षक भी नहीं रुकते हाॅस्टल में, चौकीदार दूसरे के घर में बैठकर संभालते हैं हॉस्टल
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