आत्मनिर्भरता से ही महिलाओं का विकास
महिलाओंमें आर्थिक आजादी के लिए जरूरी है उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। आत्मनिर्भर महिला ही समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ सकती है। यह निचोड़ आस्था वूमेन सोशल संस्था की कार्यशाला में परिचर्चा के दौरान निकाला गया। संस्था ने महिला और उनकी आर्थिक आजादी पर कार्यशाला का आयोजन किया था। नयापारा में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा लक्ष्मीकांत द्विवेद्वी थे।
नपा अध्यक्ष राशि महिलांग समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में संस्था प्रमुख तारिणी चंद्राकर पार्षद मीना वर्मा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थीं। महिलाओं को संबोधित द्विवेद्वी ने कहा देश कि आर्थिक आजादी और विकास में महिलाओं की भूमिका अब भी वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए। इस मामले में देश ने 60 वर्षाे में भी कोई ज्यादा प्रगति नहीं की है महिलाओं के संबंध में जो आकंड़े आए है वो ज्यादा उत्साह जनक नहीं है। नपा अध्यक्ष महिलांग ने बताया कि जिन राज्यों की आर्थिक स्थिति अच्छी है वहां पर महिलाओं के नौकरी या घर से बाहर काम करने का प्रतिशत कम है सामाजिक बंधनांे के कारण महिलाएं चाहकर भी अपना योगदान आर्थिक विकास में नहीं दे पा रही है हम चाहे कितनी भी आर्थिक आजादी की बात कर ले पर जब तक महिलाओं के विकास आजादी को लेकर खुलापन नहीं आयेगा तब तक आर्थिक आजादी अधुरी है। संस्था प्रमुख चंद्राकर ने कहा कि सामाजिक रूप से अब भी हम इस मामले में काफी पिछड़े है घर की महिलाएं काम करने के लिए जाए यह तभी संभव है जब परिवार का काफी गरीब हो महिलाओं के घर से बाहर काम करने कोे सीधे रूप से गरीबी से जोड़कर ही देखा जाना चाहिए और आकंड़े भी यही कहते है कि महिलाओं की कुल जनसंख्या का मात्र 13 प्रतिशत ही काम करने के लिए जाता है और उसमें से भी प्रति 10 महिलाओं में से 9 प्रतिशत असंगठित क्षेत्रों में काम करती है असगठित क्षत्रों में काम करने के कारण इन महिलाओं को सुविधाएं तो दूर काम करने के लिए अच्छा वातावरण तक नहीं मिल पाता।
कार्यक्रम में मीना वर्मा, सती चंद्राकर, उमा सरकार, ऋषि वर्मा, माधुरी सूर्यवंशी, तुलसी वर्मा, भारती,सावित्री, रूकमनी, ईश्वरी, रेवती, ललिता ठाकुर, नूतन, राधा, संतोषी, आशा, लीला ध्रुव, तारा भोसले, सरोज, गाौरी, दुलारी, दामनी, अन्नपुर्णा, आसियां, भुरी, सुनिता, उषा, कुंती, कुमारी, हीना आदि उपस्थित थे।
महिला और आर्थिक आजादी पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित