बीमार बताकर तीर्थ के बजाए घर भेजा
तीर्थाटन के लिए दो दिन पहले बुजुर्गों को महासमुंद बुलाया गया, लेकिन न रहने की ठीक-ठाक व्यवस्था की और न ही खाने-पीने का बेहतर इंतजाम था। टाउन हॉल में सभी को भेड़-बकरियाें की तरह रखा गया। बुजुर्ग मानसिक रूप से प्रताड़ित हुए। तीर्थ पर भेजने का समय आया, तो विभागीय अमले ने 414 में से सोलह वरिष्ठजनों को बीमार बताकर घर का रास्ता दिखा दिया। अफसरों का कहना है कि इतनी भीड़ में हर एक का ख्याल रखना संभव नहीं है।
वैष्णो देवी, राधे-श्याम मंदिर और राधे बाहू दर्शन पर ले जाने बुजुर्गों को शुक्रवार सुबह से बुलाया गया था। पांच ब्लॉक से 414 बुजुर्ग सहयोगियों के साथ पहुंचे थे। कोई बस, तो कोई निजी साधन से पहुंचे। इनके खाने और रहने की व्यवस्था भी यहीं थी। खातिरदारी में प्रशासनिक लापरवाही सामने आई। सड़क किनारे पंगत लगाकर खाना खिलाया गया। रात में भी अव्यवस्था रही। पंखों का उचित प्रबंध नहीं था। जहां सोए थे, बगल में बिजली तार खुले हुए थे। अगली सुबह नाश्ते के लिए तरसना पड़ा।
शनिवार दोपहर 2 बजे ट्रेन थी। इस कारण खान-पान पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। किसे खाना मिला, किसे नहीं, यह पूछने वाला कोई नहीं था। कई बुजुर्गों ने पेट भरने होटल का रूख किया। तीर्थयात्रा को लेकर उत्सुकता थी, इसीलिए किसी ने शिकायत नहीं की। भूखे पेट होने के बाद भी मन मसोस कर बैठे रहे। आखिर में इनमें से 16 काे बीमार बताकर घर भेज दिया गया।
सबका ख्याल रखा
तीर्थयात्रा के लिए पहुंचे सभी बुजुर्गों का पूरा ख्याल रखा गया था। पांच दिन के टूर पर रहेंगे। 11 बसों से 398 को रायपुर रवाना किया गया है। इस दौरान थोड़ी-बहुत अव्यवस्था हुई होगी। सुधाकर इंचुलकर, सहायक संचालक, समाज कल्याण विभाग, महासमुंद
महासमुंद. टाउन हाॅल में ठहरे तीर्थयात्री।