सीजेरियन के लिए डाॅक्टर नहीं, रोज रायपुर रेफर किए जा रहे दर्जनों केस
जिला अस्पताल के आॅपरेशन थिएटर में प्रसूता की मौत के बाद सर्जन को निलंबित कर दिया गया, लेकिन प्रशासन यहां सीजेरियन डिलिवरी की व्यवस्था को सुचारू बनाने गंभीर नहीं है।
प्रसव के लिए एमडी सर्जन की पदस्थापना नहीं होने के कारण पांच जिले के डेढ़ हजार से अधिक गांवों की प्रसूताओं में सुरक्षित प्रसव को लेकर चिंता बढ़ गई है। महासमुंद के अलावा गरियाबंद, बलौदाबाजार, रायपुर और नुआपाड़ा के गांवों से रोज बड़ी संख्या में महिलाएं नसबंदी के लिए पहुंच रही हैं।
सुविधा है सर्जन नहीं रायपुर रेफर कर रहे
जिला अस्पताल के आॅपरेशन थिएटर में दो कमरे हैं। एक में नसबंदी की जाती है और दूसरे में सीजेरियन की व्यवस्था है। मामा-भांचा की गीता पटेल, एमके बाहरा की मीरा बरिहा, सिनोधा की शकुंतला जांगड़े के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में सुविधाओं के बाद भी सर्जन नहीं होने के कारण उन्हें रायपुर रेफर किया गया है। उनका कहना है कि सुविधा है, तो सर्जन की उपलब्धता प्रशासन की जिम्मेदारी है। तत्काल प्रभाव से इसकी व्यवस्था देकर अधिक खर्च से लोगों को बचाना चाहिए।
जिला अस्पताल में सारी सुविधाओं के बाद भी इलाज नहीं मिल रहा
महासमुंद सीमा से जुड़े पांच जिलाें से आई महिलाओं का यहां लगातार हो रहा आॅपरेशन)
जिला अस्पताल का सीजेरियन प्रसव कक्ष, सर्जन नहीं होने के कारण अब बंद हो गया है।
सुविधाएं सभी, लेकिन अधिकांश पद रिक्त
अस्पताल में चिकित्सा सुविधा की कमी नहीं है। अधिकांश पद खाली होने के कारण मरीजों को रेफर करने की विवशता है। जिला अस्पताल में एमडी सर्जन के साथ स्त्रीरोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। सामान्य प्रसव कराए जा रहे हैं, लेकिन जिन गर्भवतियों के सामान्य प्रसव को लेकर थोड़ी सी भी आशंका है, उन्हें समय रहते रायपुर रेफर करते हैं। बिना सर्जन के सीजेरियन प्रसव करा पाना संभव नहीं है। डाॅ. आरके परदल, सिविल सर्जन, महासमुंद
नसबंदी के रोजाना हो रहे 30 आॅपरेशन
महासमुंद समेत सीमा से लगे पांच जिले के डेढ़ हजार से अधिक गांवों की निर्भरता जिला अस्पताल पर है। यहां नियमित तौर पर इन गांवों से पहुंचने वाली गर्भवतियों की जांच की जा रही है। सर्जन की कमी के बाद भी रोजाना 30 नसबंदी आॅपरेशन किए जा रहे हैं। नसबंदी के लिए डाॅ. गिरधारी चंद्राकर को जिम्मा सौंपा गया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सौ बिस्तर के अस्पताल में अलग से 30 बिस्तर नसबंदी प्रकरण के लिए है। नसबंदी के लिए दूसरे जिले से आने वाली महिलाओं को आॅपरेशन की तारीख दी जा रही है। परिवार नियोजन को लेकर गांवों में चल रहे प्रचार-प्रसार और जागरुकता कैंप के कारण नसबंदी कराने महिलाओं की संख्या बढ़ रही है।
सर्जन नहीं, सीजेरियन ओटी में लगा ताला
जिला अस्पताल में सीजेरियन प्रसव के लिए जिन तकनीकों की व्यवस्था दी गई है, वह राज्य के रायपुर, राजनांदगांव, बिलासपुर और भिलाई में मौजूद है। सीजेरियन प्रसव के लिए यहां पांच जिले के गांवों को जोड़ा गया है। दूसरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव की सुविधा है। वहां से सीजेरियन मामले महासमुंद जिला अस्पताल रेफर किए जाते रहे हैं, लेकिन अब सर्जन नहीं होने के कारण ऐसे मामलों को रायपुर रेफर किया जा रहा है। प्रसव के लिए सर्जन और स्त्रीरोग विशेषज्ञ नहीं होने से दिक्कतें हो रही हैं। ऐसी स्थिति में यहां मौजूद उच्च गुणवत्ता तकनीकों का औचित्य नहीं है।