कोई नहीं रहेगा भूखे पेट, सैकड़ों गांवों में तैयार हो रही रामकोठी
अल्प वर्षा के कारण छत्तीसगढ़ के महासमुंद और ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में सूखा है। दोनों राज्यों की सरकार ने सूखे की घोषणा करते हुए राहत के कार्य शुरू किए हैं। बावजूद इसके दोनों राज्यों की सीमा से लगे सात सौ से अधिक गांवों में ग्रामीणों ने अपनी तैयारी शुरू की है।
सूखे से उत्पन्न हालात में कोई भूखे पेट न सोए, इसकी चिंता ग्रामीणों को है और इसी के चलते गांवों में रामकोठी तैयार की जा रही है। रामकोठी को सार्वजनिक स्थल पर रखकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि विपदा के समय में एक-दूसरे की मदद के लिए वे तैयार हैं। गांव के हर किसान ने सूखे की स्थिति में जो भी उपज उन्हें हासिल हुई है, उसका दसवां हिस्सा इस कोठी में दान कर दिया है। शेष पेज-18 पर
ओडिशा के गांव पंवरतला, खलना, मोटा नयापारा, आमानारा, तोर्रा, पतालघुटकुरी, भैंसमुडी और छत्तीसगढ़ के भलेसर, द्वातरतरा, खैरट, भालूकोना, टेका, टूहलू, भोथा, खट्टी, अमनपुरी जैसे सैकड़ों गांवों में रामकोठी की परंपरा को रामायण और रामलीला मंडलियों ने स्थापित किया है।। गांव के गोवर्धन साहू, गोप साहू, श्रवण डड़सेना, आशाराम डड़सेना, भोगसिंह मांझी, बुगला मांझी आदि बताते हैं कि रामकोठी में अन्नदान की सीख उनको पूर्वजों से मिली है। परंपरा को वे बनाए रखें हैं और गांव में जरूरतमंदों की मदद इसी से की जाती है। अब सूखे से निपटने के लिए रामकोठी से किसान आपसी मदद करेंगे।
बेटी के विवाह में सूद माफ
रामकोठी को मिले ब्याज के धान का उपयोग निर्धन परिवार की बेटियों की मदद के लिए किया जाता है। अशोक तिवारी, भूखन सिन्हा ने बताया कि हर साल इस अनाज कोठी में सामान्य तौर पर ही तीन गुना बढ़ोतरी होती है। ब्याज और अंशदान का अनाज कोठी की संख्या को बढ़ाता है। गांव के चौराहों के अलावा दो-तीन मकान में भंडारण की सार्वजनिक व्यवस्था होती है। धार्मिक कार्य के अलावा बेटियों की शादी में सूद नहीं लिया जाता। पालक चाहें, तो मूल अनाज को वापस कर सकते हैं।
भोजन के लिए अनाज निशुल्क
विपदा के समय ग्रामीणों के हर घर में चूल्हा जले यह सुनिश्चित किया गया है, इसके लिए अनाज की मात्रा भी तय की गई है। बुलाकी राम और सेतराम पांडे ने बताया कि कोई परिवार भूखे पेट न रहे, इसके लिए यह व्यवस्था गांव के भीतर निशुल्क रखी गई है।
सबसे सस्ता अन्न लोन
ग्रामीणों के अनुसार यह गांवों की अपनी अन्न व्यवस्था है। कार्य विशेष को बढ़ाने के लिए लोन के रूप में भी अनाज दिया जाता है। सालभर के लिए सवाइया सूद लिया जाता है। जैसे किसी ने एक क्विंटल धान इस अनाज कोठी से लिया है, तो उसे एक साल बाद 125 किलो धान लौटाना होगा।
रामकोठी की विशेषता
पैरा की मोटी और लंबी रस्सी बनाकर उसे लपेटा जाता है, धान को उसमें भर-भर कर रस्सी को बांधते हुए उसमें तीन से चार क्विंटल अनाज रखा जाता है। उसे चारों तरफ से कसकर बांधने के बाद खुले में छोड़ा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार इसमें रखे अनाज को पैरा की गर्मी के कारण कीड़े या चूहों से क्षति नहीं पहुंचती। दस साल बाद भी इसमें रखा अनाज साबूत रहता है। पानी और सूर्य की गर्मी से भी नुकसान नहीं पहुंचता। आग भी जल्दी से इसमें नहीं पकड़ती।
महासमुंद| गांव की गली में इस तरह तैयार की जाती है रामकोठी, ग्रामीण इसे लोटना भी कहते हैं। तस्वीर पवंरतला गांव की।
सरकारी मदद की परवाह नहीं, ग्रामीणों ने खुद ही बनाई है संकट से निपटने की कार्ययोजना