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मवेशियों को अब देसी अचार खिलाकर बढ़ाएंगे दूध का उत्पादन

5 वर्ष पहले
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दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग ने नया नुस्खा पशुपालकों के सामने रखा है। यह नुस्खा है पशुओं को देसी अचार खिलाने का। प्रयोग के तौर पर कुछ पशुपालकों ने इसे अपनाने की बात कही है। फायदा दिखने पर देसी अचार को ही प्रमुखता दी जाएगी। विभाग के अनुसार इससे पशुओं में विटामिन की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और वे अधिक दूध देंगे। वहीं कम लागत में पोषक तत्व तैयार होंगे

जिले के सराईपाली और महासमुंद के पशुपालकों ने पशुओं को देसी अचार खिलाने के प्रयोग की शुरुआत भी कर दी है। सराईपाली ब्लॉक के नानकपाली के किसान जगतराम पटेल के यहां चार दुधारू पशु हैं। उन्होंने बताया कि सबके लिए पशु आहार संभव नहीं है। इसीलिए देसी अचार बनाने के तरीके को सीखेंगे। लाफिन के पीतांबर यादव भी इस नुस्खे को अपनाएंगे। इनके पास 15 दुधारू पशु हैं और रोज 50 लीटर दूध होता है। पशुओं के चारे पर अधिक खर्च आने से मुनाफा कम है। दुधारू पशुओं में विटामिन बढ़ाने के लिए पशु आहार भी काफी मात्रा में लगता है। कमोबेश इस आहार को कम करने के लिए विभाग ने नया तरीका निकाला है। अफसरों का दावा है कि इस तरीके से पशुपालक कम लागत और गांव में ही पोषक तत्वों की भरपाई के लिए आहार तैयार कर सकेंगे। अभी पशु आहार की कीमत 12 से 15 सौ रुपए प्रति क्विंटल में मिल रहा है। अचार बनाने में मात्र 150 से 200 रुपए खर्च आएगा।

बैग से तैयार किया जाएगा आहार
अचार तैयार करने के लिए बैग तैयार किया जाएगा, जो 50 किलो का होगा। इसी में हरा चारा काटकर उसमें अचार की सामग्री मिलाकर बैग को बंद कर दिया जाएगा। कुछ ही दिनों में पशु चारा के रूप में अचार बन जाएगा। बैग देने के लिए सरकार की ओर से तैयारी शुरू करने की बात कही जा रही है।

अचार से दूध देने की क्षमता बढ़ेगी
जमीन में गड्ढा बनाकर देशी अचार तैयार किया जा सकता है। इससे पशुओं को जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे और कम खर्च में ज्यादा मुनाफा होगा। इसके तरीके पशुपालकों को बताया जा रहा है। कुछ ने तो अपनाना भी शुरू कर दिया है। डॉ. धर्मदास झरिया, उप संचालक पशुपालक विभाग, महासमुंद

इस तरह तैयार होगा अचार
एक घनमीटर जमीन में पशुपालकों को गड्ढा खोदकर पोताई करना होगा। उसमें चारा काटकर डालना पड़ेगा। काटे गए चारे में एक किलो नमक, एक किलो गुड़ और एक लीटर शीरा का घोल छिड़कने के बाद ढंकना होगा। ध्यान रखना होगा कि उसमें हवा का प्रवेश न हो। एक सप्ताह बाद गड्ढे में रखा चारा देसी अचार तैयार हो जाएगा। इसे चारे में मिलाकर पशुओं को खिलाने से दूध देने की क्षमता बढ़ेगी। इसको लगातार खिलाने से पशुओं में विटामिन ए, बी और सी की कमी दूर होगी।

साढ़े 5 लाख लोगों के पास दुधारू पशु
जिले में रोज 65 हजार लीटर दूध होता है। 24 हजार लीटर दूध दुग्ध महासंघ को जाता है। शहर में ही रोजाना 15 हजार लीटर दूध की खपत है। 175 सोसायटियों के माध्यम से 7770 सदस्य इसकी आपूर्ति करते हैं। अभी जिलेभर में साढ़े पांच लाख लोगों के पास दुधारू पशु है।

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