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बच्चों की जिद, घर में हो शौचालय, माताएं भी साथ

5 वर्ष पहले
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बच्चों की जिद से जल्द ही नवापारा गांव स्वच्छ भारत मिशन की कड़ियों में जुड़ जाएगा। गांव को खुले में शौचमुक्त करने के लिए महिलाओं के साथ उनके बच्चे भी मदद कर रहे हैं। कोडार नहर में बहकर जमा हुए गिट्टी को बीनकर घर में टायलेट की नींव रखी जाएगी। बच्चों की सहभागिता निश्चित रूप से मिशन को कामयाबी दिलाएगा। इस सोच को पूरा करने में गरीबी आड़े आ रही है, मगर इस दिशा में महिलाओं के बढ़ते कदम को सरकारी मदद ने हवा दे दी है।

परसदा ब ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम नवापारा नहर से सटकर है। रोज सुबह से ही महिलाएं नहर में बच्चों के साथ फावड़ा और टोकनी लेकर एकत्रित होती हैं। और यहीं से रेत के ढेर में शौचालय निर्माण की मुहिम शुरू कर दी जाती है। रविवार को महिलाएं व बच्चों को रेत के ढ़ेर में गिट्टी तलाशते देखा गया। बच्चे गिट्टी को बिनकर टोकनी में डाल रहे थे। फुलकुंवर, सकुन ने कहा, अपने लिए न सही बच्चों के खातिर यह सब कर रहे हैं। उनकी आने वाली भविष्य पीढ़ी को खुले में शौच जाना न पड़े इसीलिए टायलेट बनवाएंगे। गिट्टी और रेती खरीदने के लिए उतने पैसे भी नहीं हैं, मगर उनके बच्चे चाहते हैं कि स्वच्छ भारत मिशन सफल हो। हालांकि, गरीबी आड़े जरूर आ रही है, पर तिनका-तिनका इकट्ठा करके गांव को ओडीएफ बनाने की दिशा में महिलाओं ने कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। सरपंच परमेश्वर ध्रुव ने पंचायत को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया और सरकारी मदद बाद में दिए जाने की बात कही। इससे प्रभावित होकर बच्चे भी इस काम में जुट गए हैं।

महासमुंद | शौचालय निर्माण के लिए नहर किनारे रेत की खुदाई करती महिलाएं।

ये गांव

ओडीएफ घोषित
जिले के ओडीएफ घोषित ग्राम पंचायतों में बावनकेरा, मुंगईमाता, चितमखार, लहंगर, भावा, उल्बा, कमरौद, कसेकेरा, मुनगासेर, भुरकोनी, मोंहगांव, तिलकपुर, भुताबाहरा, मोहका, लोहरिनडीपा, भौंरादादर, टीपा, कोलिहादेवरी, पाटसेंद्री, केदुवां, बिरकोल शामिल हैं। एक महीने के भीतर 10 गांव और ओडीएफ घोषित किए जाएंगे। जिले में 1120 गांव हैं।

दिखने लगा है परिणाम
स्वच्छ भारत मिशन की परिकल्पना को साकार करने प्रशासन ने फुल-फ्लैश काम करना शुरू कर दिया है। साल 2017 तक जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। अफसर से लेकर जनप्रतिनिधि एक-एक गांव को ओडीएफ बनाने गोद ले लिया है। अभी तक जिले के 21 गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। जब भी प्रशासनिक मीटिंग होती है या फिर गांवों में अफसर पहुंचते हैं तब ग्रामीणों को शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। ग्राम पंचायतों की सहभागिता भी बढ़ी है। लिहाजा, इसका रिजल्ट अब सामने आने लगा है।

टायलेट बनने के बाद मिलेगा अनुदान
टायलेट बनने के बाद सरकारी मदद हितग्राहियों को दी जाएगी। इसी आस में नवापारा की महिलाएं भी हैं और वे अपने घरों में शौचालय बनाने के लिए सामग्री एकत्रित करने में जुटी हुई हैं। शासन की ओर से एक शौचालय निर्माण पर 12 हजार रुपए हितग्राही को दिया जाएगा। इससे कुछ हद तक हितग्राहियों को मदद मिल जाएगी। हालांकि, इतनी रकम से शौचालय नहीं बन सकता है, बावजूद स्वच्छता को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है।

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