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प्रसूता की मौत, चक्काजाम... रायपुर की टीम ने दोबारा किया पीएम, सर्जन सस्पेंड

5 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल में हुई प्रसूता की मौत के बाद शुरू हुआ हंगामा मंगलवार को आंदोलन में बदल गया। परिजनों के साथ ग्रामीण और शहर के सभी दलों से जुड़े लोगों ने नेशनल हाइवे पर घंटेभर चक्का जाम किया। आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच कई बार झूमा-झटकी भी हुई। हंगामे के बीच रायपुर से आई डॉक्टरों की टीम ने मृतका का दाेबारा पीएम किया। इसके बाद लापरवाही के आरोप में सर्जन काे निलंबित किया गया। सिविल सर्जन के खिलाफ जांच के आश्वासन पर परिजन 30 घंटे बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर गए।

जिला अस्पताल के आॅपरेशन थिएटर में प्रसूता रोमनबाई साहू (21) की मौत के मामले में मंगलवार को भी जमकर हंगामा हुआ। साेमवार को पिथौरा से पहुंचे डाॅक्टरों के दल ने शव परीक्षण के बाद कहा था कि मौत स्पाइनल एनीस्थिसिया के तुरंत बाद हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने लापरवाह डाॅक्टर को बर्खास्त कर गैर इरादतन दोहरी हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करते हुए आंदोलन किया। परिजनों की मांग पर मंगलवार सुबह रायपुर से डॉक्टरों की टीम बुलाई गई। इस बीच मृतका के परिजन, गांव के लोग और विभिन्न संगठनों से जुड़े दल के सदस्यों ने मंगलवार को नेशनल हाइवे पर जाम किया। अांदोलनकारी दोषी डॉक्टर के साथ सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

आंदोलन इतना उग्र था कि कई बार प्रशासन के साथ आंदोलनकारियों की झड़प भी हुई। दूसरी तरफ रायपुर से पहुंची टीम में शामिल डाॅ. तृप्ति नागरिया, डाॅ. प्रतिभा साहू, डाॅ. ओपी सुंदरानी और डाॅ. एस बाग ने दोबारा पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट सौंपी।

रिपोर्ट को आधार मानकर स्वास्थ्य आयुक्त अविनाश चंपावत ने सर्जन डाॅ. हेमंत चंद्रवंशी को निलंबित करने का आदेश जारी किया। निलंबन आदेश की सूचना के बाद आंदोलनकारियों का गुस्सा शांत हुआ। सीएस डाॅ. आरके परदल के खिलाफ जांच का आश्वासन मिलने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार के लिए शव लिया।

दोबारा शव परीक्षण कर चीरघर से बाहर निकलते रायपुर से पहुंचे जांच दल के सदस्य डा तृप्ति नागरिया, डा प्रतिभा साहू, डा ओपी सुंदरानी और डा एस बाग।

डाॅक्टर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को आंदोलनकारियों ने घंटेभर एनएच-535 को जाम किया।

मृतका रोमनबाई

ओटी रूम के पिछले दरवाजे से भागा था सर्जन
जिला अस्पताल में रविवार दोपहर प्रसव पीड़ा के चलते रोमनबाई साहू को भर्ती कराया गया था। स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अलका परदल ने प्रारंभिक जांच में कहा कि नार्मल डिलिवरी होगी, दर्द बढ़ने तक इंतजार करना होगा। सोमवार सुबह सर्जन डाॅ. हेमंत चंद्रवंशी ने नार्मल डिलिवरी से इनकार करते हुए ऑपरेशन के लिए परिजनों से सहमति ली। सुबह 10:30 बजे रोमनबाई को ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया। चार घंटे तक परिजन ओटी के बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन कोई बाहर नहीं आया। परिजनों ने स्टाफ से पूछा, तो पता चला कि रोमन बाई और बच्चे की मौत हो गई है। डॉक्टर चले गए हैं। रोमन बाई की मौत के बाद सर्जन डाॅ. हेमंत चंद्रवंशी ओटी के पिछले रास्ते से निकल गए थे। उन्होंने न तो मृतका के परिजनों को मौत की सूचना दी और न ही अस्पताल प्रबंधन को कुछ बताया।

सीएस के खिलाफ लगे नारे, हटाने की मांग
सर्जन की बर्खास्तगी की मांग कर रहे आंदोलनकारियों का आरोप था कि सिविल सर्जन भी लापरवाह हैं। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि ओटी में किस डाॅक्टर की ड्यूटी है। परिजनों ने सीएस पर आरोप लगाया कि शव परीक्षण करने वाले डाॅक्टरों पर दबाव बनाकर रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं। आंदोलन में शामिल मनोज कांत साहू, योगेश्वर चंद्राकर, मयंक शेखर, निखिल कांत और ग्रामीणों के समर्थन में उतरे विधायक डाॅ. विमल चोपड़ा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरजीत चावला, भाजपा के मोती साहू ने कहा कि अस्पताल में सालों से जमे डाॅक्टरों को हटाने की जरूरत है। यहां अराजकता का माहौल है। डाॅक्टरों को भगवान की संज्ञा दी गई है, लेकिन ये मौत का सबब बनते जा रहे हैं। डाॅक्टरों के प्रति जनता का विश्वास खत्म हो रहा है। आंदोलनकारियों ने सीएस के खिलाफ नारे लगाए।

विधानसभा अध्यक्ष ने दिलाया जांच का भरोसा
विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए मृतका के ससुर शंकरलाल साहू को आश्वस्त किया है कि बिसरा रिपोर्ट के बाद दोषियों के खिलाफ ठाेस कार्रवाई की जाएगी। अग्रवाल के साथ हुई चर्चा का जिक्र करते हुए शंकरलाल साहू ने बताया कि विस अध्यक्ष ने बहू की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित कराई है। भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट से पता चला है कि सर्जन डाॅ. हेमंत चंद्रवंशी ने लापरवाही बरती है।

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