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पालिकाध्यक्ष के समर्थन में उतरे कांग्रेसी पार्षद

5 वर्ष पहले
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नगर पालिका में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। भाजपा नेताओं के आरोप के बाद अब कांग्रेसी पार्षद पालिकाध्यक्ष पवन पटेल के समर्थन में सामने आए हैं। राजनीतिक उठा-पटक का असर शहर के विकास पर पड़ रहा है। अब तक शहर में एक भी ऐसा काम नहीं हो सका है, जिसे उपलब्धि के तौर पर गिनाया जा सके।

सामान्य परिषद की बैठक में 5 फरवरी को 13 प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे गए थे। इसमें पेयजल के लिए शासन से मिले 80 लाख रुपए, सांस्कृतिक भवन निर्माण समेत अन्य प्रस्ताव शामिल थे। नेता प्रतिपक्ष और भाजपा पार्षदों ने इस काम को पीएचई से कराने की बात कही, लेकिन एेसा नहीं किया गया। इतना ही नहीं, उनकी ओर से कही गई बातों को मिनिट बुक में दर्ज भी नहीं किया गया। इस पर नाराज भाजपा पार्षदों ने जमकर हंगामा मचाया था। पालिका में दूसरे मद के करीब 13 लाख रुपए खर्च कर दिए गए हैं। इन आरोपों के जवाब में अब कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा पार्षदों को विकास विरोधी बताते हुए पालिकाध्यक्ष पवन पटेल को समर्थन दिया है। कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि भाजपा के ही नगरीय प्रशासन मंत्री ने मापदंड तय किए हैं। उसके आधार पर ही अध्यक्ष और कांग्रेस पार्षदों ने शहर विकास के प्रस्तावों को स्वीकृति दी है। भाजपा पार्षद नियमों को दरकिनार कर काम कराने का दबाव बना रहे हैं।

13 महीने का कार्यकाल हुआ पूरा : नगर पालिका में 12 जनवरी 2015 को पालिकाध्यक्ष समेत पार्षदों ने शपथ ली थी। एक साल एक महीने का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस दौरान करीब 20 करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे गए हैं। इसमें आधे से ज्यादा राशि तो दे दी गई है, लेकिन काम नहीं हो पाए हैं।

पार्षद निधि का काम भी नहीं हो रहा
शासन की ओर से दी गई योजना मद की राशि का उपयोग दूसरे कामों में नहीं किया जा सकता। यह रकम पालिका के खाते में महीनों से जमा है। पहले इसमें मिलने वाले ब्याज की राशि की बंदरबांट हो जाती थी। अब शासन को हर तीन महीने में हिसाब देना पड़ता है। यही नहीं ब्याज की रकम लौटाना भी पड़ता है। इस वजह से अब इस मद का भी उपयोग नहीं किया जा सकता। पालिका का स्थापना व्यय महीने में 50 लाख रुपए से अधिक है। इसके एवज में वसूली केवल एक तिहाई है। इससे विकास कार्यों में दिक्कत हो रही है। यहां तक की पार्षद निधि के भी काम नहीं हो पा रहे हैं।

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