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संस्कृत मन की एकाग्रता बढ़ाती है: खरे

Mahasamund News - महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य द्वारा संस्कृत दिवस के अवसर पर एक...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2017, 03:35 AM IST
संस्कृत मन की एकाग्रता बढ़ाती है: खरे
महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य द्वारा संस्कृत दिवस के अवसर पर एक दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य डाॅ. एके खरे ने कहा कि संस्कृत स्पीच थैरेपी में मददगार है और मन की एकाग्रता को बढ़ाती है। जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृत भाषियों की मांग होने के कारण लगभग 15 विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

मुख्य अतिथि पूर्व अध्यक्ष छग संस्कृत बोर्ड डाॅ. गणेश कौशिक ने कहा कि संस्कृत में सबसे अधिक शब्द है। वर्तमान में संस्कृत शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है। यह किसी भी विषय के लिए अद्भूत खजाना है और किसी अन्य भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दों में वाक्य पूरा हो जाता है। कार्यक्रम में प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संयोजक डाॅ. अनसूया अग्रवाल ने कहा कि रक्षाबंधन और संस्कृत में जोड़ने की शक्ति विद्यमान है। शायद इसलिए रक्षाबंधन एवं संस्कृत दिवस एक ही दिन मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि देववाणी के रूप में प्रसिद्ध संस्कृत प्राचीनतम भाषा होने के साथ-साथ सभी भाषाओं की जननी है। हमारे वेद संस्कृत में लिखे गए हैं और संस्कृत के ज्ञाता सर्वज्ञ माने जाते हैं। विशेष अतिथि गुरुकुल विद्यालय के आचार्य कोमल ने कहा कि संस्कृत दुनिया के अकेली ऐसी भाषा है, जिसे बोलने में जीभ की संपूर्ण मांसपेशियों का इस्तेमाल होता है।

महासमुंद| पीजी कालेज में संस्कृत दिवस कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि।

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