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एक्सपायरी दवाओं का उपयोग कर रहे बच्चे

5 वर्ष पहले
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स्कूलों में मौजूद फर्स्ट एड बाॅक्स की दवाइयां एक्सपायरी हो चुकी हैं और स्कूली बच्चे अपनी मर्जी से उनका उपयोग कर रहे हैं। लाफिन खुर्द के स्कूल में गुरुवार को यह सब शिक्षकों की मौजूदगी में हुआ। शिक्षक जवाबदारी लेने के बजाय कह रहे हैं कि दवाई बांटना उनका काम नहीं है। प्रधान पाठक जानें। डीईओ ने मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रधान पाठक समेत स्कूल के सभी शिक्षकों की एक दिन की तनख्वाह काट दी है।

मामले का खुलासा भास्कर टीम की पड़ताल में सामने आया। गुरुवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे पूर्व माध्यमिक शाला लाफिन खुर्द में स्कूल के बच्चे प्रधान पाठक कक्ष की आलमारी में रखे फर्स्ट एड बाॅक्स को लेकर बैठे थे। बच्चे सिरदर्द और मरहम-पट्टी का सामान खोज रहे थे। बॉक्स की दवाइयां कालातीत हो चुकी थीं। छह शिक्षकों में चार शिक्षक ही मौजूद थे, जो स्टाफ रूम में बैठे गप मार रहे थे। बच्चे कौन सी दवा ले रहे हैं, यह देखने वाला कोई शिक्षक नहीं था। भास्कर की टीम ने जब शिक्षकों को इस बारे में बताया, तो वे सभी प्रधान पाठक कक्ष पहुंचे और एक्सपायरी दवा और बच्चों के खुद इलाज करने को लेकर सफाई देने लगे।

ये शिक्षक थे मौजूद : लाफिन खुर्द स्कूल में सुबह शिक्षक भूषणलाल निषाद, टीआर साहू, पुष्पा पटेल, डिगम चंद्राकर, निरंजन साहू मौजूद थे। सभी अपनी-अपनी क्लास में थे। जिस कक्षा में टीचर नहीं थे, उस कक्षा के बच्चे प्रधानपाठक कक्ष में खुद अपनी मरहम-पट्टी कर रहे थे। प्रधानपाठक ने मामले में सफाई दी कि डाक पहुंचाने बरोड़ाबाजार गया था, इसलिए पहुंचने में देर हुई।

कालातीत ओआरएस पी रहे थे बच्चे
लाफिन खुर्द स्कूल में फर्स्ट एड बाॅक्स में रखा ओआरएस, टिंचर आइडिन एक्सपायरी हो चुका था। इस स्कूल में दवा की खपत इतनी है कि एक महीने पहले दिया गया बाॅक्स खाली हो गया है। आइब्रूफेन, झंडु बाम जैसे दवा खत्म हो गई है। इसलिए बच्चे दो साल पहले मिले बाॅक्स की बची एक्सपायरी दवाअों का उपयोग कर रहे हैं।

शिक्षकों पर की कार्रवाई
मामला गंभीर है। बच्चों की सेहत के प्रति शिक्षकों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। स्कूल के सभी शिक्षकों की तनख्वाह में कटौती कर दी गई है। राकेश पांडेय, डीईओ महासमुंद

महासमुंद. लाफिन खुर्द स्कूल के बच्चे खुद मरहम पट्टी करते हुए।

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