चैंबर में 8 घंटे कैद रहीं सीएमओ
महासमुंद नगर पालिका सीएमओ ज्योत्सना टोप्पो को विकास विरोधी बताते हुए गुरुवार को जनप्रतिनिधियों ने आठ घंटे तक चैंबर में रोके रखा। जनप्रतिनिधियों ने चैंबर में धरना दे दिया और कहा कि जब तक व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा, तब तक वे सीएमओ चैंबर से बाहर नहीं निकलेंगे। एसडीएम और एसडीओपी ने हस्तक्षेप किया। रात करीब साढ़े 8 बजे दोनों पक्षों में समझौता हुअा।
नगर पालिका सीएमओ ज्योत्सना टोप्पो और जनप्रतिनिधियों के बीच काफी दिनों से विवाद चला आ रहा है। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ टोप्पो पीआईसी के पारित प्रस्तावों को दरकिनार कर अपने तरीके से काम कर रही है। उनकी मनमानी के चलते कई फाइल रुकी हुई है, जिससे शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। गुरुवार दोपहर विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, पालिकाध्यक्ष पवन पटेल पार्षदों के साथ सीएमओ के चैंबर पहुंचे।
इसके बाद उन्होंने सीएमओ टोप्पो को बाहर निकलने नहीं दिया। कहना था कि उनकी मनमानी से विकास के काम प्रभावित हो रहे हैं। इसका जवाब उन्हें नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को देना पड़ रहा है।
चैंबर में मंगाई फाइल बाबू से पूछताछ
चैंबर में बैठे जनप्रतिनिधियों के गुस्से को देखकर सीएमओ टोप्पो कुछ नहीं बोलीं और न ही चैंबर से निकलने का प्रयास किया। दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। सूचना पर शाम करीब साढ़े 5 बजे एसडीएम अभिषेक अग्रवाल और एसडीओपी एमएल मोटवानी चैंबर पहुंचे। उन्होंने मामले काे संभालने का प्रयास किया। उन्होंने सीएमओ से सारी जानकारी देने कहा, जो विधायक मांग रहे थे। सभी फाइलों को मंगाया गया और संबंधित विभाग के बाबू से भी पूछताछ की गई। रात करीब साढ़े 8 बजे दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और फिर जनप्रतिनिधि चैंबर से बाहर आए।
कर्मचारियों को रिलीव करने से नाराजगी
पालिका में कर्मचारियों की कमी है। इसके बाद भी नगरीय प्रशासन विभाग ने तीन कर्मचारियों का तबादला कर दिया। इनको कार्यमुक्त करने पर पीआईसी ने प्रस्ताव पारित कर रोक लगाई थी। इसके बाद भी सीएमओ ने उन्हें कार्यमुक्त कर दिया। इससे पालिकाध्यक्ष समेत पीआईसी मेंबर नाराज हो गए। यह बात विधायक तक भी पहुंची। नाराज विधायक समेत अन्य सीएमओ चैंबर पहुंच गए। इस बात का पता चलते ही समर्थक भी पालिका पहुंच गए और देखते ही देखते भीड़ लग गई।
एसडीएम व एसडीओपी ने मौके पर पहुंचकर कराया समझौता
महासमुंद. नगरपालिका में सीएमओ को घेर कर बैठे जनप्रतिनिधि।