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राजा का दरिद्र मित्र भी उसके बराबर होता है: पं. दिलीप

5 वर्ष पहले
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पुरानी बस्ती कुर्मीपारा में स्व. सोहनलाल चंद्राकर की स्मृति में भागवत ज्ञान गंगा सप्ताह का आयोजन किया गया है। बड़ी संख्या में भागवत कथा सुनने भक्त पहुंच रहे हैं। प्रवचनकर्ता पंडित दिलीप त्रिपाठी के भक्ति संगीत में लोग झूमते रहे। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए प्रवचनकर्ता पं. त्रिपाठी ने कहा कि भगवान कृष्ण ने संसार को मित्र धर्म की शिक्षा दी। मित्र दरिद्र क्यों न हो, फिर भी वह हमेशा समकक्ष ही रहता है। कभी भी मित्र के साथ भेद नहीं करना चाहिए। सच्चा मित्र वहीं है जो बुरे समय में अपने मित्र धर्म को निभा जाए।

उन्होंने बताया कि मित्र के यहां खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। इस मर्यादा का ध्यान रखते हुए घर में कुछ भी न होते हुए दूसरों के यहां से अक्षत मांगकर कृष्ण को भेंट करने सुदामा पहुंचे थे। भगवान धन संपत्ति की नहीं बल्कि भाव के भूखे हैं, इसलिए मात्र तुलसी पत्र के अर्पण से ही वे संतुष्ट हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं।

महासमुंद. भागवत कथा सुनाते हुए पंडित दिलीप त्रिपाठी।

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